KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

सावन में भक्ति

सावन की रिमझिम फुहार के बीच संख व डमरू की आवाज मन की जड़ता को हिला देती है। एक नवीन प्रेरणा अन्तर्मन को ऊर्जान्वित करने लगती है। प्रकृति प्रेम सबसे बड़ी ईश्वर…

प्रकृति से खिलवाड़/बिगड़ता संतुलन-अशोक शर्मा

भौतिकता की होड़ में मानव ने प्रकृति के साथ बहुत छेड़छाड़ की है। अपने विकास की मद में खोया मानव पर्यावरण संतुलन को भूल गया है। इस प्रकार के कृत्यों से ही आज कोरोना…

बढ़ती जनसंख्या – घटते संसाधन

बढ़ती जनसंख्या - घटते संसाधनअशिक्षा ने हमें खूब फसाया,धर्म के नाम पर खूब भरमाया ।अंधविश्वास के चक्कर में पड़,जनसंख्या बढ़ा हमने क्या पाया?बढ़ती जनसंख्या धरा…

पिता दिवस पर कविता

पिता दिवस पर कवितादर्द को भीतर छुपाकर,बच्चों संग मुसकाते। कभी डाँट फटकार लगाते,कभी कभी तुतलाते।हँस हँसकर मुँहभोज कराते,भूखे रहते हैं फिर भी।स्वच्छ जल पीकर…

विश्व बाल मजदूरी निषेध दिवस पर कविता

विश्व बाल मजदूरी निषेध दिवस पर कविताउमर जब खेलने की थी खिलौनों से।वो सोचने लगा,पेट कैसे भरेगा निबालों से।भाग्य से किश्मत से, होकर के मजबूर।अबोध बालक ही, बन…

संगीत जीवन का अंग है

संगीत जीवन का अंग हैसंगीत जीवन का अंग है,जो रहता जीवन संग है।संगीत उदासी की सहेली है,जीवन की दुल्हन नई नवेली है।यह साधना का स्वर है,गुनगुनाता जग भँवर…