होली-अशोक दीप
kundaliyan

होली-अशोक दीप

होली-अशोक दीप होली छटा निहारिए, बरस रहा मधु रंग ।मंदिर-मस्जिद प्रेम से, खेल रहे मिल संग ।।खेल रहे मिल संग, धर्म की भींत ढही है ।अंतस्तल में आज, प्रीत की…

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श्याम

प्रेम-रंग हँसकर सखी, डाले जब घनश्याम । मन मथुरा होने लगा, तन वृंदावन धाम ।। ,©अशोक दीप

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सावन

(04) एक कुण्डलिया रविवार 15-12-2019 ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ सावन से बदली कहे, सुनो सजन इक बात । आ सरवर को चूमलें, सूख रहे जलजात ।। सूख रहे जलजात, कुमुदिनी मान न पाए…

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