KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

शीशपटल पर रहता हूँ-कवियों की आपाबीती पर कविता

शीशपटल पर रहता हूँ-कवियों की आपाबीती पर कविता . (१६,१४)शीश महल की बात पुरानी,रजवाड़ी किस्से जाने।हम भी शहंशाह है, भैया,शीश पटल के दीवाने।आभासी रिश्तों के

जन्मदिन प्रियतम का

जन्मदिन प्रियतम का दोहा छंद. 1प्रियतम प्राण अधार है,सुरसरगम सब साज।जन्मदिवस पे मैं करूँ,ये रुचि का शुभकाज।. 2पावन पुन्य पुनीत पल,प्रणय प्रीत

सुख-दुख की बाते बेमानी

सुख-दुख की बाते बेमानी सुख-दुख( १६,१६)मैने तो हर पीड़ा झेली।सुख-दुख की बाते बेमानी।दुख ही मेरा सच्चा साथी,श्वाँस श्वाँस मे रहे सँगाती।मै तो केवल दुख ही

पनघट मरते प्यास

पनघट मरते प्यास {सरसी छंद 16+11=27 मात्रा,चरणांत गाल, 2 1}.नीर धीर दोनोे मिलते थे,सखी-कान्ह परिहास।था समय वही,,अब कथा बने,रीत गये उल्लास।तन मन आशा चुहल

मां शारदे नमन लिखा दे

मां शारदे नमन लिखा दे नमन् लिखा दे. १६,१४वीणा पाणी, ज्ञान प्रदायिनी,ब्रह्म तनया माँ शारदे।सतपथ जन प्रिय सत्साहित,हितकलम मेरी माँ तार दे।मात शारदे नमन्

अटल बिहारी वाजपेई के लिए कविता

अटल बिहारी वाजपेई के लिए कविता हरिगीतिका छंद. (मापनी मुक्त १६,१२). अटल - सपूतश्री अटल भारत भू मनुज,हीशान सत अरमान है।जन जन हृदय सम्राट बन कवि,ध्रुव बने

बरस मेघ खुशहाली आए

बरस मेघ खुशहाली आए बरसे जब बरसात रुहानी,धरा बने यह सरस सुहानी।दादुर, चातक, मोर, पपीहे,फसल खेत हरियाली गाए,बरस मेघ, खुशहाली आए।।धरती तपती नदियाँ

पर्यावरण संरक्षण

पर्यावरण संरक्षण .(लावणी छंद १६,१४)सुनो मनुज इस,अखिल विश्व में,पृथ्वी पर जीवन कितने।पृथ्वी जैसे पिण्ड घूमते,अंतरिक्ष में वे कितने।।नभ में गंगा , सूरज

विधाता छंद मय मुक्तक- फूल

विधाता छंद मय मुक्तक- फूल रखूँ किस पृष्ठ के अंदर,अमानत प्यार की सँभले।भरी है डायरी पूरी,सहे जज्बात के हमले।गुलाबी फूल सा दिल है,तुम्हारे प्यार में पागल।सहे

विधाता छंद में प्रार्थना

विधाता छंद में प्रार्थना विधाता छंद१२२२ १२२२, १२२२ १२२२. प्रार्थना.सुनो ईश्वर यही विनती,यही अरमान परमात्मा।मनुजता भाव मुझ में हों,बनूँ मानव सुजन आत्मा।.रहूँ