वैश्विक महामारी कोरोना

विषय - विश्व महामारी शीर्षक- जगत कल्याण विधा -कविता रचनाकार- बाँके बिहारी बरबीगहीया राज्य -बिहार (बरबीघा पुनेसरा) उथल -पुथल हो चला भूमंडल धरणी पे मची है हाहाकार है काल के…

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शीर्षक- पवित्र प्रेम

विषय - कलरव का प्रेम कथा शीर्षक- पवित्र प्रेम विधा -कविता रचनाकार- बाँके बिहारी बरबीगहीया राज्य -बरबीघा बिहार (पुनेसरा ) एक कपोत ने आकर हमसे कह डाले सब प्रेम की…

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प्रेम से बड़ा इस दुनिया में कोई उत्तम मार्ग नहीं (अथाह प्रेम)

विषय - प्रेम और शहनाई शीर्षक- अलौकिक प्रेम विधा -कविता रचनाकार -बाँके बिहारी बरबीगहीया राज्य -बिहार बरबीघा (पुनेसरा) अन्नय प्रेम है तुझसे री तेरे स्वर लहरी की मधुर तान। तुम…

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बिहार बरबीघा (पुनेसरा) के कवि बाँके बिहारी बरबीगहीया द्वारा रचित कविता तुम और चाँद जो निश्छल प्रेम को को दर्शाता है ।।

विषय- अन्नय प्रेम शीर्षक- तुम और चाँद विधा -कविता रचनाकार- बाँके बिहारी बरबीगहीया राज्य- बिहार बरबीघा (पुनेसरा) चाँद तू आजा फिर से पास मेरे बिन तेरे जिन्दगी अधूरी है ।…

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वियोगी प्रेमी चकोर

विषय- चाँद और चकोर शीर्षक- वियोगी प्रेमी चकोर विधा -कविता रचनाकार- बाँके बिहारी बरबीगहीया राज्य -बिहार बरबीघा(पुनेसरा) प्रेम में पागल चाँद से चकोर प्यार करे । उम्र भर देखे शशि…

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बाँके बिहारी बरबीगहीया द्वारा रचित छठ पर्व आधारित कविता जिसे पढ़कर आपको आनंद मिलेगा(chhath parv kavita)

शुक्ल पक्ष पष्ठी  तिथि कोकार्तिक मास में आती है ।सूर्य की प्रिय बहन प्रकृति छठी मईया कहलाती है ।सूर्योपासना का महान पर्व मेंछठी माँ दिव्य रूप दिखाती है।महान व्रत इस छठ…

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बिहार के कवि बांकेबिहारी बरबीगहीया जी का छत्तीसगढ़ प्रदेश को लेकर जो भावनायें हैं उसे सुंदर ढंग से अपने कविता में पिरोया है …. (Hari ka desh Chhattisgarh)

हरि का देश छत्तीसगढ़-बाँके बिहारी बरबीगहीया आर्यावर्त के हृदय स्थल परछत्तीसगढ़ एक नगर महान।कर्मभूमि रही श्रीराम प्रभु कीसंत गाहीरा,घासीदास बड़े विद्वान।संस्कृति यहाँ की युगों पुरानीअदृतीय धरा यह पावन धाम ।यहाँ…

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धर्म से धन को अर्जित करने की शिक्षा देती बांकेबिहारी बरबीगहीया की यह कविता आपको एक नई राह देगी (Dharm se Dhan)

धन को धर्म से अर्जित करनातुम परम आनंद को पाओगे।सुख, समृद्धि ,ऐश्वर्य मिलेगी तुम धर्म ध्वजा फहराओगे।जीवन खुशियों से भरा रहेगायश के भागी बन जाओगे ।अपने धन के शेष भाग कोदान-…

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कवि बाँके बिहारी बरबीगहीया द्वारा रचित दीपावली पर्व आधारित कविता ,जो हमें आपस में मिलजुल कर रहने का संदेश देती है

शुभ दिन आज दीपोत्सव आयाअपने संग खुशी उमंग को लाया।सजा-धजा हर घर का कोनारंग-बिरंगी खुशियाँ है लाया।आपसी बैर कटुता को मिटाकरमिलजुल कर रहने को सिखाया।सत्य,धर्म,तप,त्याग के बल परप्रभु का पर्व…

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अपनी दीवाली आई है- बाँके बिहारी बरबीगहीया(apni diwali aai hai)

अपनी दीवाली आई है कार्तिक मास की सर्द ऋतु मेंदेखो  दीपावली आई है ।जगमगा उठी अपनी वसुंधरा चहुँओर खुशीहाली छाई है ।सुख समृद्धि भरकर दीपोत्सवअपनी थाली में लाई है ।अंधकार भगा…

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