निषादराज के दोहे:जय गणेश 
गणेश चतुर्थी विशेषांक

निषादराज के दोहे:जय गणेश 

निषादराज के दोहेजय गणेश ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~जय गणेश जय गजवदन,कृपा सिंधु भगवान।मूसक वाहन  दीजिये, ज्ञान बुद्धि वरदान।।01।। शिव नंदन गौरी तनय, प्रथम पूज्य गणराज।सकल अमंगल को हरो,पूरण हो हर काज।।02।। हाथ जोड़ विनती…

टिप्पणी बन्द निषादराज के दोहे:जय गणेश  में

यार तेरी कसम

गज़ल : सादर समीक्षार्थ - 212 212 212 212 ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ रूठ जाऊँ कभी तो मनाना मुझे। कर ये वादा कभी मत सताना मुझे।। गर कहीं भूल जाऊँ ये राहे वफ़ा,…

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जय गणेश गणनायक देवा,बिपदा मोर हरौ-बोधन राम निषादराज
गणेश चतुर्थी विशेषांक

जय गणेश गणनायक देवा,बिपदा मोर हरौ-बोधन राम निषादराज

बिष्णु पद छंद- *जय गणेश*(छत्तीसगढ़ी में)~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~जय गणेश गणनायक देवा,बिपदा मोर हरौ।आवँव तोर दुवारी मँय तो, झोली मोर भरौ।।1।। दीन-हीन लइका मँय देवा,आ के दुःख हरौ।मँय अज्ञानी दुनिया में हँव,मन मा…

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हे शारदे माँ

हरिगीतिका छंद- छत्तीसगढ़ी में- 2212 2212 2212 2212 *हे शारदे माँ* (1) हे शारदे माँ ज्ञान के,भंडार झोली डार दे। आये हवौं मँय द्वार मा,मन ज्योति भर अउ प्यार दे।।…

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बसन्त गीत

आधार छंद- सार छंद बसन्त गीत - सादर समीक्षार्थ - ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ लगे सुहाना मौसम कितना, मन तो है मतवाला। देख बसन्त खिले कानन में, फूलों की ले माला।। शीतलता अहसास…

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बसन्त आयो रे

ताटंक छंद - गीत *ऋतु बसन्त आयो रे* ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ ऋतु बसन्त शुभ दिन आयो रे, सबके मन को भायो रे। पात-पात हरियाली सुन्दर, मधु बन भीतर छायो रे।। नीला अम्बर…

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निषादराज के दोहे

*निषादराज के विविध दोहे*- (1) पाषाण मत बनना पाषाण तू,मन में रखना धीर। दया धर्म औ प्यार से,बोलो ज्यों हो खीर।। (2) क्षितिज दूर क्षितिज पर आसमां,नीला रंग निखार। जैसे…

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काजल

*विषय- काजल* कुण्डलियाँ- सुंदरता की चाह में,काजल आँजे नैन। हिरनी जैसी देखती,कुछ नहिँ बोले बैन।। कुछ नहिँ बोले बैन,आँख से सब कुछ कहती। दिल में हरदम प्यार,सजाकर वो ही रहती।।…

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निषादराज के दोहे

*निषादराज के दोहे* (1) *दामिनी* देखा जबसे दामिनी,चकाचौंध अब नैन। होश हुआ मदहोश अब,ढलने को अब रैन।। (2) *व्योम* व्योम हुआ गहरा बहुत,बादल छाये आज। नहीं मिला अब चैन भी,नहीं…

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