KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

Ghazal: पत्थर – चन्द्रभान ‘चंदन’

मैं दरिया के बीच कहीं डूबा पत्थर , तू गहनों में जड़ा हुआ महँगा पत्थर।। तुझ को देख के नदी का पानी ठहर गया, तुझ को छू कर हरकत में आया पत्थर।। तेरा नाम लिखा जैसे…

नज़्म – मुझे समझा रही थी वो

बहुत मासूम लहजे में, बड़े नाज़ुक तरीके सेमेरे गालों पे रखके हाथ समझाया था उसने येसुनो इक बात मानोगे,अगर मुझसे है तुमको प्यार,तो इक एहसान कर देनाजो मुश्किल

चन्द्रभान ‘चंदन’ के द्वारा सजाये गये बेहतरीन शेरों का मज़ा लीजिये…. (Chandan…

इरादा क़त्ल का हो और आँखों में मुहब्बत हो,भला इस मौत से चन्दन कोई कैसे मुकर जाए..------------------कभी लगता था बिन तेरे मुक़म्मल दिन नहीं होगा,अधूरी शाम…

वो मुझे याद आता रहा देर तक (wo mujhe yaad aata rha der tak)

वो मुझे याद आता रहा देर तक,मैं ग़ज़ल गुनगुनाता रहा देर तकउसने पूछी मेरी ख़ैरियत वस्ल मेंमैं बहाने बनाता रहा देर तकउसने होठों में मुझको छुआ इस तरहये बदन कँपकपता रहा…

जो शख़्स जान से प्यारा है-चन्द्रभान ‘चंदन'(jo sakhsh jan se pyara hai)

जो शख़्स जान से प्यारा है पर करीब नहींउसे गले से लगाना मेरा नसीब नहींवो जान माँगे मेरी और मैं न दे पाऊँग़रीब हूँ मैं मगर इस क़दर ग़रीब नहींहसीन चेहरों के अंदर फ़रेब…

मुझे ये पूछते हैं सब मेरे ग़म का सबब* क्या है(mujhe ye puchhate hai sab mere gam ka sabab kya hai)

मुझे ये पूछते हैं सब मेरे ग़म का सबब* क्या है,ज़माना किस कदर समझे मुहब्बत की तलब क्या हैजो आँखें सो नहीं पाई है ख़्वाबों के बिखरने सेउन आँखों से ज़रा पूछो बिना…

भला इस मौत से चंदन कोई कैसे मुकर जाए(bhala is mout se chandan koi kaise mukar jaye)

 *ग़ज़ल* -------------------------करूँ *तफ़सील* अगर तेरी तो हर लम्हा गुज़र जाए,तुझे देखे अगर जी भर कोई तो यूँ ही मर जाए..यहाँ हर शख्स मेरे दर्द की *तहसीन*…

तुम्हारी यादों को आँसुओं से भिगो भिगो के मिटा रहा हूँ(tumhari yado ko aashuo se bhigo bhigo ke mita…

तुम्हारी यादों को आँसुओं से भिगो भिगो के मिटा रहा हूँ,बचे हुए थे सबूत जितने समेटकर सब जला रहा हूँ।              कि एक तुम हो जिसे परिंदों के प्यास पे भी तरस…

चंदन के ग़ज़ल (chandan ke gazal)

तुम्हारी यादों को आँसुओं से भिगो भिगो के मिटा रहा हूँ,बचे हुए थे सबूत जितने समेटकर सब जला रहा हूँ.    कि एक तुम हो जिसे परिंदों के प्यास पे भी तरस नहीं है,मैं…

वतन में ये जो दहशत है,सियासत है, सियासत है.(vatan me ye jo dahsat hai ,siyasat hai siyasat hai)

 *ग़ज़ल* _वतन में ये जो दहशत है,__सियासत है, सियासत है..__मुझे तुम याद आती हो,__शिकायत है, शिकायत है..__जिधर देखूं तुम्ही तुम हो,__मुहब्बत है, मुहब्बत…