अलविदा मेरे चाहने वाले…, ग़ज़ल, कमल यशवंत सिन्हा ‘तिलसमानी’

जब उसने ही छोड़ दिया मुझको मेरे हवाले तुम्हीं बताओ फिर मुझको कौन संभाले??? अब फिर किसी पे ऐतबार न होगा करीब आने के चाहे कोई सौ तरकीब निकाले। जिसने…

टिप्पणी बन्द अलविदा मेरे चाहने वाले…, ग़ज़ल, कमल यशवंत सिन्हा ‘तिलसमानी’ में

हाँ! मैं कवि हूँ

साहित्य के चूल्हे पर शब्दों का तवा चढ़ा वैचारिकता की लकड़ी में भावनाओं की आग जलाकर कलम की चिमटी से मैं कविताओं की रोटियां सेंकता हूँ हाँ! मैं कवि हूँ।…

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राधा और मीरा

*_आखिर माताएं राधा और मीरा क्यों नहीं चाहती?_* एक विचार प्रस्तुत किया गया कि "हर माँ चाहती है कि उनका बेटा कृष्ण तो बने मगर कोई माँ यह नहीं चाहती…

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