KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

गणपति अराधना- कवयित्री क्रान्ति

गणपति अराधना विघ्नहारी मंगलकारी गणपति लीला अनेक-2 सज रहे हैं मंडप प्रभु बज रहे हैं देखो ताल झूम रहे हैं भक्त तुम्हारे प्रभु कर उनका उद्धार…

कहते हैं लोग हमारा देश आजाद है

भाई भाई में देखो कितनी लड़ाई है हर चौराहे पर बैठा देखो कसाई है पर्दे में आज भी रहती है बहू बेटियां कहते हैं लोग हमारा देश आजाद है। बेटियों के…

नारी की व्यथा बताती हुई क्रान्ति की कविता

,,,,,,,,,,नारी की व्यथा,,,,,,,, बरसों पहले आजाद हुआ देश पर अब भी बेटी आजाद नहीं हर बार शिकार हो रही बेटियां है यह एक बार की बात नहीं । जिस बेटी से…

खिलती हुई नन्ही कली हूं( khilati huyi nanhi kali hu)

      बेटी की पुकारपिता का मैं ख्याल रखूंगीतेरे कहे अनुसार मैं चलूंगीरूखी सूखी ही मैं खा लूंगीमत मार मुझे सुन मेरी मांमुझे धरा पर आने तो दे।।बोझ मैं…

शपथ उठाती हूं मैं भारत की बेटी(sapath uthati hu mai bharat ki…

शपथ उठाती हूं मैं भारत की बेटीमैं कभी भी  सर नहीं झुकाऊंगीलाख कर लो तुम भ्रूण की हत्याफिर भी जन्म मै लेती ही जाऊंगीकब तक तुम मुझको मारते रहोगेकभी तो…

बेटा बेटी में भेद क्यों(beta beti me bhed kyo)

,,,,,,बेटा बेटी में में भेद क्यों,,,,,,,सागर होते हैं बेटे, तो गंगा होती है बेटियांचांद होते हैं बेटे, तो चांदनी होती हैं बेटियांजग में दोनों ही अनमोल…

बेटियां

बेटियां******मोम की गुड़िया सी कोमल होती है बेटियांमाता पिता के दुलार में पलती है बेटियांअनजान घर की बहू बनती तब भी बेटी का ही रूप होती है बेटियांखुदा…

आओ मिलकर पेंड़ लगाएं

आओ मिलकर पेंड़ लगाएंसूनी धरा को फिर खिलाएंधरती मां के आंचल को हमरंगीन फूलों से सजाएंआओ मिलकर पेड़ लगाएं।।न रहे रिश्तों में कभी दूरियांचाहे हो गम चाहे…

चांदनी रात

,,,,,,,चांदनी रात,,,,,,चांदनी रात मेंपिया की याद सताएमिलने की चाहदिल में दर्द जगाए।। हवा की तेज लहरजिगर में घोले जहरकैसे बताऊं मैं तुम्हेंसोई नहीं मैं…