गणपति अराधना-  कवयित्री क्रान्ति
गणेश चतुर्थी विशेषांक

गणपति अराधना- कवयित्री क्रान्ति

गणपति अराधना विघ्नहारी मंगलकारी गणपति लीला अनेक-2 सज रहे हैं मंडप प्रभु बज रहे हैं देखो ताल झूम रहे हैं भक्त तुम्हारे प्रभु कर उनका उद्धार विघ्नहारी................ गणपति..............2 हर घर…

1 Comment

नारी की व्यथा बताती हुई क्रान्ति की कविता

,,,,,,,,,,नारी की व्यथा,,,,,,,, बरसों पहले आजाद हुआ देश पर अब भी बेटी आजाद नहीं हर बार शिकार हो रही बेटियां है यह एक बार की बात नहीं । जिस बेटी…

0 Comments

खिलती हुई नन्ही कली हूं( khilati huyi nanhi kali hu)

      बेटी की पुकारपिता का मैं ख्याल रखूंगीतेरे कहे अनुसार मैं चलूंगीरूखी सूखी ही मैं खा लूंगीमत मार मुझे सुन मेरी मांमुझे धरा पर आने तो दे।।बोझ मैं…

0 Comments

शपथ उठाती हूं मैं भारत की बेटी(sapath uthati hu mai bharat ki beti)

शपथ उठाती हूं मैं भारत की बेटीमैं कभी भी  सर नहीं झुकाऊंगीलाख कर लो तुम भ्रूण की हत्याफिर भी जन्म मै लेती ही जाऊंगीकब तक तुम मुझको मारते रहोगेकभी तो…

0 Comments

मैं मजदूर हूं किस्मत से मजबूर हूं (main majdoor hun)

मैं मजदूर हूं किस्मत से मजबूर हूं !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!चांद की चाहत मुझमे भी है बहुतपर हैसियत से बहुत ही लाचार हूंकमाता रोज हूं  जीनेभर के लिएपर बचा कुछ नहीं पाता मेरे…

0 Comments

बेटा बेटी में भेद क्यों(beta beti me bhed kyo)

,,,,,,बेटा बेटी में में भेद क्यों,,,,,,,सागर होते हैं बेटे, तो गंगा होती है बेटियांचांद होते हैं बेटे, तो चांदनी होती हैं बेटियांजग में दोनों ही अनमोल फिर भेद कैसा।।कमल होते…

0 Comments

बेटियां

बेटियां******मोम की गुड़िया सी कोमल होती है बेटियांमाता पिता के दुलार में पलती है बेटियांअनजान घर की बहू बनती तब भी बेटी का ही रूप होती है बेटियांखुदा की सौगात…

0 Comments

आओ मिलकर पेंड़ लगाएं

आओ मिलकर पेंड़ लगाएंसूनी धरा को फिर खिलाएंधरती मां के आंचल को हमरंगीन फूलों से सजाएंआओ मिलकर पेड़ लगाएं।।न रहे रिश्तों में कभी दूरियांचाहे हो गम चाहे मजबूरियांमिलकर घर सब…

0 Comments

चांदनी रात

,,,,,,,चांदनी रात,,,,,,चांदनी रात मेंपिया की याद सताएमिलने की चाहदिल में दर्द जगाए।। हवा की तेज लहरजिगर में घोले जहरकैसे बताऊं मैं तुम्हेंसोई नहीं मैं रातभर।।दिल के झरोखे मेंदस्तक देती हवाएंदेखकर…

0 Comments