KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

प्रकृति से खिलवाड़ का फल – महदीप जंघेल

प्रकृति से खिलवाड़ और अनावश्यक विनाश करने का गंभीर परिणाम हमे भुगतना पड़ेगा। जिसके जिम्मेदार हम स्वयं होंगे। समय रहते संभल जाएं। प्रकृति…

जनसंख्या विस्फोट – महदीप जंघेल

जनसंख्या वृद्धि देश और समाज के लिए गंभीर खतरा है। आबादी लगातार बढ़ रहे है। और संसाधन घट रहे है। सोच को बदलना होगा,बढ़ते जनसंख्या पर काबू करना होगा और संसाधन में…

जीवन का अमृत है संगीत (विश्व संगीत दिवस पर कविता)

संगीत जीवन में सारे गम ,दुख, पीड़ा को मिटाकर मन को शांत करता है ।और खुशियां प्रदान करता है। कई लोगो के लिए संगीत औषधि है।वो खुश रहते है।उनका जीवन फिर से जी उठता…

नारा भर हांकत हन (व्यंग्य रचना)

एकर सेती भैया हो , जम्मो मनखे मन,ला मिलजुल के,लालच ला दुरीहा के पर्यावरण बचाए बर कुछ करना पड़ही। लेकिन ये हा केवल मुंह अउ किताब भर मा तिरिया जाथे।

वृक्ष की पुकार कविता -महदीप जंघेल

चंद पैसों के लिए वृक्ष का सौदा न करे। वृक्ष है, तो विश्व है। वृक्ष हमारी माँ के समान है, जो हमे जीवन प्रदान करके सब कुछ अर्पण करती है। अतः पेड़ लगाएं और…

जल बिना कल नहीं -महदीप जंघेल(जल संकट पर कविता)

जल बिना कल नहीं -महदीप जंघेल(जल संकट पर कविता) जल से मिले सुख समृद्धि,जल ही जीवन का आधार।जल बिना कल नही,बिना इसके जग हाहाकार। जल से हरी-भरी ये

कोरोना टीका जरूर लगवाएं – महदीप जंघेल

आप सभी से विनम्र अपील है कि,किसी भ्रांतियों में न पड़े। किसी को न ही डराएं, न किसी को बहकाएं। प्राणरक्षक कोरोना का टीका अवश्य लगवाएं।

नर्स दिवस पर कविता: सेवाभावी परिचारिका – महदीप जंघेल

यदि डॉक्टर भगवान का रूप है, तो नर्स भी देवी का रूप है। जो हर पल मां के समान मरीजों की देखभाल करती है। उनको मेरा सादर प्रणाम