KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

कलम के सिपाही -मुंशी प्रेमचंद जी

कलम के सिपाही -मुंशी प्रेमचंद जीमेरे मूर्धन्य मुंशी प्रेमचंद जी थे बड़े " कलम के सिपाही "अब......."भूतो न भविष्यति"हे ! मेरे जन जन के हमराही !उपन्यास…

इन्हें पहचान -राजकुमार मसखरे

इन्हें पहचान !~~~~~~~~~~~~~कितने राजनेताओं के सुपुत्रसरहद में जाने बना जवान !कितने नेता हैं करते किसानीये सुन तुम न होना हैरान !बस फेकने, हाँकने में…

मेरे श्रीराम और प्रकृति पूजा( श्रीराम जी पर कविता) -राजकुमार मसखरे

मेरे श्रीराम और प्रकृति पूजा~~~~~~~~~~~~~~~~~ओ मेरे प्रभु वनवासी रामआज पधारे अयोध्या धाम,चौदह वर्ष तक वन को घूमेअब करो अविरल आराम !निषाद राज गंगा…