तोड़े हुए रंग-विरंगे फूल:नरेन्द्र कुमार कुलमित्र
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तोड़े हुए रंग-विरंगे फूल:नरेन्द्र कुमार कुलमित्र

नरेन्द्र कुमार कुलमित्र: तोड़े हुए रंग-विरंगे फूल टीप-टीप बरसता पानी छतरी ओढ़े सुबह-सुबह चहलकदमी करते घर से दूर सड़कों तक जा निकला देखा-- सड़क के किनारे लगे हैं फूलदार पौधे…

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अरे लकीर के फकीरों
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अरे लकीर के फकीरों

अरे लकीर के फकीरों ! -06.06.2020 अपने-अपने मुहावरों पर वे और तुम जिते आ रहे हो सदियों से मुहावरा कभी बदला ही नहीं न उनका न तुम्हारा शासक हैं वे…

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हिन्दी कविता:  केवल वक्ता के लिए — नरेन्द्र कुमार कुलमित्र
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हिन्दी कविता: केवल वक्ता के लिए — नरेन्द्र कुमार कुलमित्र

केवल वक्ता के लिए - नरेन्द्र कुमार कुलमित्र 5.6.2020 ---------------------------------------/हे मेरे प्यारे वक्तावाक कला में प्रवीणबड़बोला महाराजबातूनी सरदारकृपा करके हमें भी बताओकि तुम इतना धारा प्रवाहकैसे बोल लेते हो..?बिना देखे,बिना…

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हिन्दी कविता: रायपुर सेंट्रल जेल में– नरेन्द्र कुमार कुलमित्र
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हिन्दी कविता: रायपुर सेंट्रल जेल में– नरेन्द्र कुमार कुलमित्र

रायपुर सेंट्रल जेल में-- नरेन्द्र कुमार कुलमित्र 23.06.2020-----------------------------------------------------/रायपुर में पढ़ता था मैंपंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालयथा दर्शनशास्त्र का विद्यार्थीजन्मभूमि सा प्यारा था आज़ाद छात्रावास गाँव वालों की नज़रों मेंथा बड़ा पढन्तामेरे…

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हिन्दी कविता : जार्ज फ्लॉयड- नरेन्द्र कुमार कुलमित्र -10.06.2020
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हिन्दी कविता : जार्ज फ्लॉयड- नरेन्द्र कुमार कुलमित्र -10.06.2020

जार्ज फ्लॉयड तुम आदमी थे तुम आदमी ही रहे पर तुम्हें पता नहीं कि शैतानी नज़रों में आदमी होना कुबूल नहीं होता आख़िर तुम मारे गए काश तुम जान गए…

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सरकारी रिपोर्ट

सरकारी रिपोर्ट- 16.05.2020 -------------------------/ सरकारी रिपोर्ट में कभी मजदूर नहीं होते मज़दूरों की पीड़ा नहीं होती मज़दूरों के बिलखते बच्चे नहीं होते नहीं होता उनके अपनी धरती से पलायन होने…

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विकास यात्री

विकास-यात्री - 15..05.2020 -----------------------/ निकला था वह विकास यात्रा में कमाया अपार धन अर्जित किया अपार यश अब उसे भूख नहीं लगती नींद नहीं आती अब केवल अपनी तृष्णा के…

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रोटी

रोटी - 15.05.2020 ------------------------- पता नहीं इसे रोटी कहूँ या भूख या मौत आईना या चाँद मज़बूरी या ज़रूरी कभी मैं रोटी के लिए रोती हूँ कभी रोटी मेरे लिए…

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विकास के सवालों में आदमी को जोड़ना

विकास के सवालों में आदमी को जोड़ना -13.05.2020 --------------------------/ उनकी सोच विकासवादी है उन्हें विश्वास है केवल विकास पर विकास के सारे सवालों पर वे मुखर होकर देते है जवाब…

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रुकना भी है चलना

रुकना भी है चलना - 13.05.2020 ----------------------------/ हमें तो बस यही सिखाया गया है चलते रहो चलते रहो बस चलते ही रहो चलते ही रहने का नाम है जिंदगी रुक…

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