KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

जब भी सुनता हूँ नाम तेरा- निमाई प्रधान’क्षितिज’ का एक ऐसी कविता जो आपका भी मन मोह…

कविता/निमाई प्रधान'क्षितिज'*"जब भी सुनता हूँ नाम तेरा!"*------------------- तेरे आने की आहटें... बढ़ा देती हैं धड़कनें मेरी !मैं ठिठक-सा जाता हूँ-जब भी…

स्मृतियाँ और राधा (smiritiyan aur radha)

रतजगे हैं हमने कई किये...प्रतीक्षा में तुम्हारी हे प्राणप्रिये !प्रति स्पन्दन संग नाम तुम्हारा हम राधे-राधे जपा किये ।।१।।वो यमुना-तट का तरु-तमाल था विरह-स्वर…

तुम्हारे प्यार में कब-कब बिखरा नहीं हूँ मैं (tumhare pyar me kb kab bikhra nahi)

_________________________नैनों की झील में इश्क़ का पतवार लियेकौन कहता है कि कभी उतरा नहीं हूँ मैं ?बिखरा तो बहुत हूँ ज़िंदगी के जद्दोजहद में तुम्हारे प्यार में…

निःशब्द तो नहीं

*"निःशब्द तो नहीं!"*~~~~•●•~~~~निःशब्द तो नहीं !किंचित् भी नहीं !!बस...नहीं हैं आजशहद या गुलाबी इत्र में डुबोये सुंदर-सुकोमल-सुगंधित शब्दनहीं हैं आज…

एक कविता हूँ

एक कविता हूँ! उंगलियों में कलम थामेसोचता हूँ…कि कहींहै वह ध्वनिजो उसे ध्वनित करे…!मैं अंतरिक्ष में तैरता..कल्पनाओं मेंछांटता हूँशब्दमीठे -मीठेकोई शब्द मिलता

सबसे बढ़कर देशप्रेम है

सबसे बढ़कर देशप्रेम है प्रेम की वंशी, प्रेम की वीणा।प्रेम गंगा है……प्रेम यमुना ।। प्रेम धरा की मधुर भावना।प्रेम तपस्या,प्रेम साधना ।। प्रेम शब्द

तुम फूल नहीं बन सकती

तुम फूल नहीं बन सकती कलतुम गुल थी,गुलाब थी,एक हसीन ख्व़ाब थी।हर कोईदेखना चाहता था तुम्हें !हर कोई….छूना चाहता था तुम्हें !!कल तकपुरुष ने तुम्हेंकेवल कुचोंऔर

हिन्दी हमारी जान है

*हिन्दी हमारी जान है* हिन्दी हैं हम..हिन्दी हमारी जान है, हम सबकी जुबान है !! रग-रग में बहता लहू ही है, ये हर हृदय की तान है!! हिन्दी हैं हम..हिन्दी

ज़िंदगी की राह

ज़िंदगी की राह~~~~•●•~~~~ ज़िंदगी की राह..जो तुम चल पड़े हो !देखना..झंझावतों कीभीड़ होगी ,आशियां टूटेगा..हरदम..हर गली में..फिर बसेरे की ज़रूरत-नीड़ होगी !!

क्षितिज

क्षितिज रवि-रश्मियाँ-रजत-धवल पसरीं वर्षान्त की दुपहरी मैना की चिंचिंयाँ-चिंयाँ से शहर न लगता था शहरी वहीं महाविद्यालय-प्रांगण में प्राध्यापकों की बसी सभा थी