अचरज मा परगे(acharach ma parge)

कोठी तो बढ़हर के* छलकत ले भरगे।बइमानी के पेंड़ धरे पुरखा हा तरगे॥अंतस हा रोथे संशो मा रात दिन।गरीब के आँसू हा टप-टप ले* ढरगे॥सुख के सपुना अउ आस ओखर…

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कोठी तो बढ़हर के छलकत ले भरगे (kothi to badhar ke chhalakat le bharage)

कोठी तो बढ़हर के* छलकत ले भरगे।बइमानी के पेंड़ धरे पुरखा हा तरगे॥अंतस हा रोथे संशो मा रात दिन।गरीब के आँसू हा टप-टप ले* ढरगे॥सुख के सपुना अउ आस ओखर…

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कहें सच अभी वो जमाना नहीं है(kahe sach abhi wo zamana nahi hai)

कहें सच अभी वो जमाना नहीं है। यहाँ सच किसी को पचाना नहीं है॥मिले जो अगर यूँ किसी को अँगाकर।  खिला दो उसे तो पकाना नहीं है॥ लगे लूटने सब…

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