KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

रिश्तों का ख़ून- 15 मई विश्व परिवार दिवस विशेष कविता

ख़ून के रिश्ते सम्भालो, रिश्तों का ना ख़ून करो।। परिवार - सिर्फ पति-पत्नी और एक-दो बच्चों से ही नहीं बल्कि परिवार पूरा खानदान होता है। हमारे खून के रिश्ते ही…

चिंता से चिता तक

चिंता से चिता तक मां बाप को बच्चों के भविष्य की चिन्ता,महंगे से स्कूल में एडमिशन की चिन्ता।स्कूल के साथ कोचिंग, ट्यूशन की चिन्ता,शहर से बाहर हाॅस्टल में

जाने तुम कहां गए

जाने तुम कहां गए - मेरी रचना अरमानों से सींच बगिया,जाने तुम कहां गए।अंगुली पकड़ चलना सीखाकर,जाने तुम कहां गए।। सच्चाई के पथ हमको चलाकर,जाने तुम कहां

नारी तू ही “शक्ति” है (महिला जागृति)

नारी तू ही "शक्ति" है नारी तू कमजोर नहीं, तुझमें अलोकिक शक्ति है,भूमण्डल पर तुमसे ही, जीवों की होती उत्पत्ति है।प्रकृति की अनमोल मूरत, तू देवी जैसी लगती

बेटी तो है फूल बागान( महिला जागृति पर रचना )

बेटी तो है फूल बागान( महिला जागृति पर रचना ) गांव, शहर में मारी जाती, बेटी मां की कोख की,बेटी मां की कोख की, बेटी मां की कोख की।। जूही बेटी, चंपा बेटी,