KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

विरोधाभासपूर्ण कविता

विरोधाभासपूर्ण कविता आर आर साहू, छत्तीसगढ़ हो न यदि संवेदना पर पीर की,मोल क्या जानोगे श्री रघुवीर की! दुष्ट दुर्योधन दुशासन हैं

होड़ लगी है विश्व में, करें इकट्ठा शस्त्र

होड़ लगी है विश्व में, करें इकट्ठा शस्त्र। राजनीतिक होने लगी,खुले आम निर्वस्त्र।। सीमाएँ जब लाँघता,है सत्ता का लोभ। जन-मन को आक्रांत कर,पैदा करता…

धन्य वही धन जो करे, आत्म-जगत् कल्याण

धन्य वही धन जो करे, आत्म-जगत् कल्याण धन्य वही धन जो करे, आत्म-जगत् कल्याण। करे कामना धर्म की,मिले मधुर निर्वाण। संग्रह केवल वस्तु का,विग्रह से…

दर्द के कई रूपों को बताती हुई आर आर साहू जी अनोखी कविता (लघु…

--दर्द के रूप-- स्वयं के दर्द से रोना,अधिकतर शोक होता है। परायी-पीर परआँसू,बहे तो श्लोक होता है। निकलती आदि कवि की आह से प्रत्यक्ष भासित है, हृदय…

दिन की उजली बातों के संग,मधुर  सलोनी शाम लिखूँ- R R SAHU

तेरे लिए दिन की उजली बातों के संग,मधुर सलोनी शाम लिखूँ। रातें तेरी लगें चमकने,तारों का पैगाम लिखूँ।। पढ़ने की कोशिश ही समझो,जो कुछ लिखता जाता…

जन्मजात होता नहीं,अपराधी इंसान- R R Sahu

सभी चाहते प्यार हैं,राह मगर हैं भिन्न। एक झपटकर,दूसरा तप करके अविछिन्न।। आशय चाल-चरित्र का,हमने माना रूढ़। इसीलिए हम हो गए,किं कर्तव्य विमूढ़।।…

आर आर साहू के दोहे

ईश प्रेम के रूप हैं,ईश सनातन सत्य। अखिल चराचर विश्व ही,उनका लगे अपत्य ।। कवि को कब से सालती,आई है पर पीर। हम निष्ठुर,पाषाण से,फूट पड़ा पर नीर।।…

दीप वंदन -आर आर साहू(Deep vandan)

--------------दीप वंदन ------------दीप वंदन कर सकें हम,भाव ऐसा ईश देना।नम्रता से प्रेम-पद में झुक सके वो शीश देना।।षड्विकारों के तमस से पंथ जीवन का…