KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

माँ दुर्गा पर सुधा शर्मा के पिरामिड कविता

माँ! रूपा मोहिनी वर दात्रीअरि मर्दनीसंकट हरणी जय जगजननी ।माँ नेह उदधिआल्हादिनी सर्वव्यापिनीमंगल करणीसर्व  दुख हरणी ।माँ सृष्टाब्रम्हाण्ड अतुलित…

सरसी छंद में रचित कविता ‘विघ्न हरो गणराज’-सुधा…

विघ्न हरो गणराज हे गौरी नंदन हे गणपति,प्रथम पूज्य  महराज। कृपा करो हे नाथ हमारे,विघ्न हरें गण राज।। घना तिमिर है छाया जग में, भटक रहा इंसान।

विश्व पर्यावरण दिवस विशेषांक सुधा के दोहे (Sudha’s dohe…

धानी चुनरी जो पहन,करे हरित श्रृंगार। आज रूप कुरूप हुआ,धरा हुई बेजार।सूना सूना वन हुआ,विटप भये सब ठूंठ। आन पड़ा  संकट विकट,प्रकृति गई है रूठ।।जंगल सभी…

जीवन के झंझावातों में,श्रमिक बन जाते है(jivan ke jhanjhavato…

नन्ही नन्ही कोमल कायानिज स्वेद बहाते हैं।जीवन के झंझावातों में,श्रमिक  बन जाते है।हाथ खिलौने वाले  देखो,ईंटों को झेल रहे।नसीब नहीं किताबें इनकोमिट्टी…

मैं भुंइया अंव(mai bhuiyan aav)

बछर- बछर ले पानी पीएव ,मोर कोरा के सुख ला भोगेव,रोवत हे तुंहर महतारी ,मोर लइका मन अब तो चेतव, सब के रासा -बासा मोर संग,मैं जग के सिरजइया अंव। मैं…

सुधा शर्मा के वृध्दों पर दोहे (SUDHA SHARMA KE DOHE)

बूढ़ा बरगद रो रहा, सूख गये सब पात।अपनों ने ही मार दी,तन पर देखो लात।।दिया उमर भर आज तक,घनी सभी को छाँह।भूल गये सब कृतज्ञता,काट रहे हैं बाँह।।ढूंढ रहा…

सुधा शर्मा के रामनवमी पर दोहे

जनम लिए रघुनाथ हैं,हर्षित जन मन आज।आए जग भरतार हैं,रघुकुल के सरताज।।चैत्र शुक्ल तिथी नवम,शुभ दिन शुभ कर नाम।राजा दशरथ प्राण प्रिय,जनमे रघुवर राम।।राम…

जाऊँ कैसे घर मैं गुजरिया(jau kaise ghar mai gujariya)

नटखट कान्हा ने रंग दी चुनरिया जाऊँ कैसे घर मैं गुजरियानीर भरन मैं चली पनघट को देख ना पाई उस नटखट कोडाली पे बैठा कदंब के ऊपरधम्म से कूदा मेरे पथ पररोकी…

औरत

*औरत*-------------औरत जानती है विस्तार कोदेखती है संसार कोकभी नन्ही सी बिटिया बनकरकभी किसी की दुल्हन बनकरकभी अपनी ही कोख मेंएक नयी दुनिया को…