KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

धरती तुझे प्रणाम

धरती तुझे प्रणाम माथ नवाकर नित करूँ , धरती तुझे प्रणाम ।जीव जंतु का भूमि ही , होता पावन धाम ।। खेले कूदे गोद में , सबकी माँ हो आप ।दुष्ट मनुज को भी सदा ,

हरे यादों के पन्ने-सुकमोती चौहान “रुचि”

हरे यादों के पन्ने किया याद है कौन , हिचकियाँ मुझको आई ।गुजरे अरसे बाद , कसक हिचकोले खाई ।जिल्द पुराने झाड़ , हरे यादों के पन्ने ।अधर खिला मुस्कान , नेत्र जल

निर्भया न्याय दिवस

*निर्भया न्याय दिवस* छप्पय छंद सन् दो हजार बीस,बीस मार्च रहा अनुपम। स्वर्णिम दिन है आज,शांत मन तन है शुद्धम। हुई न्याय की जीत,निर्भया तेरी जय हो। दुराचार…

मिट्टी का घट की महिमा बताती सुकमोती चौहान रुचि की छप्पय छंद में यह अनूठा काव्य

छप्पय छंद ?मिट्टी का घट? मिट्टी घट की ओर ,चलो अब लौटे हम सब। प्लास्टिक का प्रतिबंध,मनुज स्वीकारोगे कब। मृदा प्रदूषण रोक,पीजिए घट का पानी। स्वस्थ रहेगा गात,…

जय जय देव गणेश,विघ्न हर्ता वंदन है-छप्पय छंद(Sukmoti chauhan Ruchi)

जय जय देव गणेश,विघ्न हर्ता वंदन है। लम्बोदर शुभ नाम,शक्ति शंकर नंदन है। सर्व सगुण की मूर्ति ,रिद्धि सिद्धि जगत मालिक। अतुल ज्ञान भंडार,सुमंगल अति

धनतेरस(छप्पय छंद)- सुकमोती चौहान “रुचि”

छप्पय छंद?धनतेरस?सजा धजा बाजार, चहल पहल मची भारीधनतेरस का वार,करें सब खरीद दारी।जगमग होती शाम,दीप दर दर है जलते।लिए पटाखे हाथ,सभी बच्चे खुश लगते।खुशियाँ भर लें…

नशा नाश की सीढ़ियाँ- सुकमोती चौहान (Nasha-Doha)

?नशा? नशा नाश की सीढ़ियाँ,सोच समझ इंसान।तन को करता खोखला,लेकर रहती जान।।बड़ी बुरी लत है नशा,रहिए इससे दूर।बेचे घर की संपदा,वह होकर मजबूर।।यह जीवन अनमोल…

सुकमोती चौहान के हाइकु (Ruchi ke haiku)

सुकमोती चौहान के हाइकु पितर पाख~ पति की तस्वीर में फूलों की माला। पूस की रात~ भुट्टे भून रही है अलाव में माँ। श्मशान घाट~ कुत्ते के भौंकने से…