KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

यदि आपकी किसी एक ही विषय पर 5 या उससे अधिक कवितायेँ हैं तो आप हमें एक साथ उन सारे कविताओं को एक ईमेल करके kavitabahaar@gmail.com या kavitabahar@gmail.com में भेज सकते हैं , इस हेतु आप अपनी विषय सम्बन्धी फोटो या स्वयं का फोटो और साहित्यिक परिचय भी भेज दें . प्रकाशन की सूचना हम आपको ईमेल के माध्यम से कर देंगे.

बाबा साहिब सा सूरमा–राकेश राज़ भाटिया

0 1,034

बाबा साहिब सा सूरमा -राकेश राज़ भाटिया

बाबा साहिब सा सूरमा--राकेश राज़ भाटिया
14 अप्रैल बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जयंती 14 April Baba Saheb Bhimrao Ambedkar Jayanti

बदलती रहेगी यह दुनिया, बदलेगा यह दौर ए जहाँ .
न हुआ है, न होगा कभी भी, बाबा साहिब सा सूरमा ..

वो जिसने कक्षा के बाहर बैठकर ज्ञान का दीया जला लिया .
वो जिसने अपनी मेहनत से, विद्या का सागर पा लिया .
वो जिसने संविधान बनाकर बदल दिया विकराल समा .
न हुआ है, न होगा कभी भी, बाबा साहिब सा सूरमा ..

वो न होता तो लोकतंत्र की बुनियादें कच्ची रह जाती .
दलित और शोषित की मन में ही फरियादें रखी रह जाती .
संविधान न करता प्रावधान तो समानता का मंजर होता कहाँ .
न हुआ है न होगा कभी बाबा साहिब सा सुरमा ..

वो अधिकार न दिलवाता अगर महिला कोई न पढ़ पाती .
कोई इंदिरा फिर इस देश की प्रधानमंत्री न बन पाती .
न किसी दलित की बेटी कभी पहुँच पाती विधान सभा .
न हुआ है, न होगा कभी भी, बाबा साहिब सा सुरमा ..

कितने राजा बने यहाँ इंसानों को गुलाम बनाकर .
कितने सम्राट हुए यहाँ मजबूरों पर हुक्म चलाकर .
पर वो बादशाह ऐसा था जिसने बनाया गुलामों को इंसां .
न हुआ है,न होगा कभी भी, भीम राव सा सूरमा ..

-राकेश राज़ भाटिया
थुरल(काँगड़ा)
हिमाचल प्रदेश

Leave A Reply

Your email address will not be published.