कविता 26 बचकर चलो हर जगह शहर है -मनीभाई नवरत्न

कविता 26
बचकर चलो हर जगह शहर है
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देखता तुझे कोई किसी की नजर है।
बच कर चलो हर जगह शहर है ।
तुम खुद को तन्हा समझो,
 पर कोई ना अजनबी।
दो पल में रिश्ते बनते हैं ,
जुड़ जाते जिनसे जिंदगी।
अभी आई खुशियों का लहर ,
अभी गुजरा ग़मों का भंवर है ।
बचकर चलो हर जगह शहर है ।
सारी तकलीफें सारी कसक
 दिल में थामें फिरता है।
दूसरों को उठाने के बहाने
खुद सड़क में गिरता है ।
यहां चाल पर चाल चले हैं
चालबाजों का बवंडर है ।
बचकर चलो हर जगह शहर है ।
अभी जन्मा और अभी
तारे छूने की बात करते हैं ।
सारी सुधि छोड़कर
अपनी धुन में  रहते हैं ।
यहां महत्वाकांक्षियों के समंदर है ।
बचकर चलो हर जगह शहर है ।
मनीभाई”नवरत्न”

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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

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