KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

बधाई हो तुम…

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

बधाई हो तुम…

भुट्टा खाते हुए
मैंने पेड़ों पर अपना नाम लिखा
तुमने उसे अपने दिल पे उकेर लिया,
तुमने दुम्बे को दुलारा
मेरा मन चारागाह हो गया;
मैंने पतंग उड़ाई
तुम आकाश हो गयीं
मैं माँझे का धागा
जो हुआ तुम चकरी बन गयी|
ऐसा क्यों होता रहा?
मैं कई दिनों तक
समझ ना सका
एक दिन दोस्तों ने कहा–
ये तो गया काम से,
और तुम तालाबंदी कर दी गयी
मेरे जीवन के कोरे पन्ने पर
बारातों के कई दृश्य बनते रहे
और गलियों का भूगोल बदल गया|
तुम्हारी पायल ,
बिंदी और महावर वाली निशानियाँ
आज भी मेरे मन में अंकित है
किसी शिलालेख की तरह,
किसी नए मकान पर
शुभ हथेली की पीले छाप के जैसी
मैं देखना चाह रहा था
बसंतोत्सव और मेरा बसंत
उनके बाड़े में कैद थी|
मैं फटी बिवाई जैसी
किस्मत लिए कोस रहा था
आसमान को तभी तरस कर
मेघ मुझे भिगोने लगी
इस भरे सावन में
मेरा प्यार अँखुआने लगा
हम भीगते हुए भुट्टा खा रहे हैं
और उसने अपने दांतों में दुपट्टा दबाते हुए
धीरे से कहा–बधाई हो तुम….
और झेंपते हुए उसने
गोलगप्पे की ओर इशारा किया…..|
– रमेश कुमार सोनी LIG 24 कबीर नगर रायपुर छत्तीसगढ़ 7049355476