KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

हिंदी संग्रह कविता-बाधाओं से भय न हमें

0 43

बाधाओं से भय न हमें


बाधाओं से भय न हमें, हम तूफानों में चलते हैं ।।


पथ चाहे घोर अँधेरा हो, दु:ख द्वंद्वों ने जब घेरा हो।
हो महा वृष्टि भीषण गर्जन, करता हो महाकाल नर्तन।
पर कब किससे डरने वाले, हम संघर्षों में पलते हैं।
हम तूफानों में चलते हैं। बाधाओं से भय न हमें ….


अत्याचारों की आँधी भी, जिसको निःशेष न कर पायी।
जो सत्य चिन्तन अक्षय है, हम उस संस्कृति के अनुयायी।
विपदाओं के कंटक वन में, हम अग्नि – शिखा बन जलते हैं

Leave a comment