बज उठी रण-भेरी / शिवमंगलसिंह ‘सुमन’

5

बज उठी रण-भेरी / शिवमंगलसिंह ‘सुमन’



मां कब से खड़ी पुकार रही,

पुत्रों, निज कर में शस्त्र गहो ।

सेनापति की आवाज हुई,

तैयार रहो, तैयार रहो।

आओ तुम भी दो आज बिदा, अब क्या अड़चन, अब क्या देरी ?

लो, आज बज उठी रण-भेरी।

अब बढ़े चलो अब बढ़े चलो,

निर्भय हो जय के गान करो।

सदियों में अवसर आया है,

बलिदानी, अब बलिदान करो।

फिर मां का दूध उमड़ आया बहनें देतीं मंगल-फेरी !

लो, आज बज उठी रण-भेरी।

जलने दो जौहर की ज्वाला,

अब पहनो केसरिया बाना ।

आपस की कलह-डाह छोड़ो,

तुमको शहीद बनने जाना ।

जो बिना विजय वापस आये मां आज शपथ उसको तेरी !

लो, आज बज उठी रण-भेरी।

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Comments are closed.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More

Privacy & Cookies Policy