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हिंदी संग्रह कविता-बलि पथ का इतिहास बनेगा

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बलि पथ का इतिहास बनेगा


बलि पथ का इतिहास बनेगा
मर कर जो नक्षत्र हुए हैं उनसे ही आकाश बनेगा।


सह न सकें जो भीषणता को, सर पर बाँध कफन निकले थे,
देख उन्हें मुस्करा कर जाते, पत्थर भी मानों पिघले थे।
इस उत्सर्गमयी स्मिति से ही माँ का मधुर सुहास बनेगा।


कायरता ने शीश झुका जब, हार अरे अपनी थी मानी।
तरूणाई ने अपने बल से, लिख दी थी रंगीन कहानी।
उनके लाल रक्त से ही, सिन्दूर का उल्लास बनेगा।


खून सींच कर फूल खिलाये, झुके शीश थे बलिदानों को।
और अमरता मिली सहज ही, बलिपथ के उन दीवानों को।
उनके बलिदानों से जग में आज नया इतिहास बनेगा।

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