बन पवनकुमार

बन पवनकुमार

पवन वेग से चल तू, बन के पवनकुमार।
रहे सदा अडिग अविचल,जीत ले हर बार॥
माँ भारती गुहारती,अब मुझे सजना है।
हर गाँव हर शहर को, स्वर्ग-सा रचना है।
बन कर्मठ तु झटपट,ये पल यूँ ना गुजार।
पवन वेग से चल तू, बन के पवनकुमार॥1।
निर्मल पथ,निर्मल जल और निर्मल हो देश का कोना-कोना।
हर जन में होती हुनर, उस हुनर को मौका दो ना।
आज स्वतंत्र और लोकतंत्र है, हाथ में कर ये संसार।
पवन वेग से चल तू, बन के पवनकुमार॥2।।
जो चुनता है,जो बुनता है;देश का ही नाम रहे।
देश ने दिया दाम तुझे, देश का ही काम रहे।
स्वाभिमान प्रकट कर,मन में भर भाव उदार।
पवन वेग से चल तू, बन के पवनकुमार॥3।।
मनीभाई नवरत्न
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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

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