KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

गांधी फिर कभी आओगे

0 79

गांधी फिर कभी आओगे

नमन बापू नमन गांधी
गांधी तुम फिर आओगे
जनमानस के पटल पर
छुद्र स्वार्थ हटाओगे।


जाति पाती ही ध्येय बना
सत्ता के गलियारों का
सत्य अहिंसा नारे बन गए
जनता को भरमाने का
बढ़ती पशुता नग्नता सी
कैसी वैचारिक विषमता है
मानवता शर्मिंदा होती
ये कैसी समरसता है।
चरखा पर हम सूत कातते
स्वालम्बन कभी सिखाओगे
भटकी देश की जनता सारी
गांधी फिर कभी आओगे


खादी बन गया सपना देखो
चरखा गरीब ही कात रहा
नारा स्वदेशी का देते देते
विदेशी को अपना रहा।
सत्याग्रह को अस्त्र बनाकर
स्वराज फिर लाओगे
पूछ रही है जनता सारी
गांधी फिर कब आओगे
बापू तुम फिर आओगे।।



अविनाश तिवारी
अमोरा
जांजगीर चाम्पा

Leave a comment