KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

बेकरार दिल हुआ बे अख्तियार

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बेकरार दिल हुआ बे अख्तियार

कैसा दर्द है ? कैसा एहसास है?
मुझसे दूर है तू लगता फिर भी पास है ।
बेकरार दिल …हुआ बे अख्तियार।
आ जा एक बार ..
तू सुनले पुकार ..।

मेरा मजहब मेरा ईमान मेरा सब कुछ तू ।
मेरा मकसद मेरा इनाम मेरा हूबहू तू।
तू जो मिला मुझे मैं हुआ दीनदार।
बेकरार …

लम्हा लम्हा बीत रहा है तेरे इंतजार में
फांसला भी बढ़ रहा है तेरे तकरार में ।
प्यार में हो गई मेरी यह कैसी हार ।
बेकरार….।

Lyrics By : मनीभाई नवरत्न

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