कविता:भीम बाबा

तांटक छंद – भीम बाबा

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दुख दर्दो को झेल जनम भर,
निर्धनता के मारे थे।
बाबा अपने निज कर्मो से,
इस जग में उजियारे थे।
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छुवाछुत को मानवता से,
जिसनें पूर्ण मिटाया था।
दीन दुखी का बना मसीहा,
देवरूप में आया था।
जिसने माना एक बराबर,
जग में कासी काबा थे।
परम् ज्ञान के पुंज शिखर जो,
भीमराव निज बाबा थे।
जीत लिया जिसने जीवन को,
नहीं कभी जो हारे थे।
बाबा अपने निज कर्मो से,
इस जग में उजियारे थे।
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नाम पिता का मिला रामजी,
माता भीमा बाई थी।
और रमा बाई संगत में,
परिणय बँध निभाई थी।
बचपन में जन जन से बाबा,
सदा सताए जाते थे।
फिर भी दुखियों के सेवा में,
अपना जनम बिताते थे।
सत्य धर्म मानवता जिसने,
नित तन मन में धारे थे।
बाबा अपने निज कर्मो से,
इस जग में उजियारे थे।
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रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे “कोहिनूर”
पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.)
मो. 8120587822
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डिजेन्द्र कुर्रे कोहिनूर

नाम -- डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पिता -- श्री गणेश राम कुर्रे माता -- श्रीमती फुलेश्वरी कुर्रे शिक्षा -- बीएससी(बायो)एम .ए.हिंदी ,संस्कृत, समाजशास्त्र ,B.Ed ,कंप्यूटर पीजीडीसीए व्यवसाय -- शिक्षक जन्मतिथि -- 5 सितंबर 1984 प्रकाशित रचनाएं -- बापू कल आज और कल(साझा संग्रह),चाँद के पार साइंस वाणी पत्रिका, छ ग जनादेश अखबार, छ ग शब्द आदि कई पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित। सम्मान -- 1. राष्ट्रीय कवि चौपाल कोटा राजस्थान प्रथम द्वितीय तृतीय 2019। 2. श्रेष्ठ सृजन रचनाकार का सम्मान। 3. बिलासा साहित्य सम्मान । 4. कला कौशल साहित्य सम्मान। 5. विचार सृजन सम्मान 2019। 6. अंबेडकर शिक्षा क्रांति अवार्ड। 7. छत्तीसगढ़ गौरव अलंकरण अवार्ड 2019 8. मुख्यमंत्री गौरव अलंकरण अवार्ड 2019 पता -- ग्राम पीपरभावना, पोस्ट- धनगांव,तहसील-बिलाईगढ़, जिला- बलौदाबाजार ,छत्तीसगढ़ पिन - 493559 मोबाइल नंबर - 8120587822