हम तेरे हैं ऋणी- भीमराव अंबेडकर जयंती विशेष

14 अप्रैल बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जयंती विशेष कविता

तुम-सा वीर विद्वान पाके, भारत है धनी।
हे भारत विधि विधाता! हम तेरे  हैं ऋणी।
घनघोर निरक्षरता की अंधेरा
था काल बना समक्ष खड़ा।
ज्ञान की मशाल लिए भीम तू,
निडर निष्पक्ष  हो के, आगे बढ़ा।
तेरी कर्मठता से आधुनिक भारत है बनी ।
हे संविधान निर्माता ! हम तेरे हैं  ऋणी।
मानवता हमसे  हो रही थी ,
ऊँच-नीच से कोसों दूर।
जात-पाँत और कर्मकांड में,
फंस गये थे होके मजबूर ।
भीम कहे, अब हमें अन्याय नहीं सहनी ।
हे दलित कष्टहर्ता! हम तेरे हैं  ऋणी ।
करके तुने अस्पृश्यता का अंत,
दिलाई हमें धार्मिक स्वतंत्रता ।
महिला विशेषाधिकार दिलाई,
उन्मूलन की आर्थिक असमानता ।
हम दलितों के लिए तू, प्रेम-वत्सला जननी।
हे आडम्बर मुक्तिदाता! हम तेरे हैं  ऋणी । ।
अंधविश्वास  की तोड़ रस्में ,
विज्ञानवाद का सहारा लिया ।
पंचशील,अनीश्वरवाद दर्शन से
पहले भारतीय बनने का नारा दिया।
हे महामानव!अनुसरण करें तेरा ये”मनी”।
हे विधिवेत्ता !  हम तेरे हैं  ऋणी ।
-मनीभाई नवरत्न
(Visited 2 times, 1 visits today)

मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

प्रातिक्रिया दे