भ्रूणहत्या-कुण्डलिया छंद

0 158


भ्रूणहत्या-कुण्डलिया छंद

साधे बेटी मौन को, करती  एक गुहार।
जीवन को क्यों छीनते ,मेरे सरजनहार।
मेरे सरजनहार,बतायें गलती मेरी।
कहँ भू पर गोविंद , करे जो रक्षा  मेरी।
“कुसुम”कहे समझाय  , पाप   जीवन भर काँधे।
ढोवोगे दिन रैन ,दुःख यह मौनहि  साधे।

पुष्पा शर्मा “कुसुम”

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Leave A Reply

Your email address will not be published.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More

Privacy & Cookies Policy