KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

जम्मू कश्मीर की कवयित्री कुसुम शर्मा अंतरा जी का बेहतरीन ग़ज़ल

0 129
ग़ज़ल

भुला बैठे थे हम जिनको वो अक्सर याद आते हैं
बहारों के हसीं सारे वो मंज़र याद आते हैं
रहे कुछ बेरहम से हादसे मेरी कहानी के
झटक कर ले गए सबकुछ जो महशर याद आते है
दिलों में खींच डाली हैं अजब सी सरहदें सबने
हुए रिश्ते मुहब्बत के जो बेघर याद आते हैं
गुज़र जाते हैं सब मौसम बिना देखे तुम्हें ही अब
वो चाहत के अभी भी सब समंदर याद आते हैं
बिछाती थी बड़े ही प्यार से मेरे लिए जो माँ
महकते मखमली बाहों के बिस्तर याद आते हैं
महशर….महाप्रलय
कुसुम शर्मा अंतरा
जम्मू कश्मीर
Leave A Reply

Your email address will not be published.