बहुत याद आता हैं बचपन का होना

0 292

बहुत याद आता हैं बचपन का होना

वो बचपन में रोना बीछावन पे सोना,,
छान देना उछल कूद कर धर का कोना,,
बैठी कोने में माँ जी का आँचल भिगोना,,
माँ डाटी व बोली लो खेलो खिलौना,,
बहुत याद आता हैं बचपन का होना।।

बहुत याद आता हैं बचपन का होना


गोदी में सुला माँ का लोरी सुनाना,
कटोरी में गुड़ दूध रोटी खिलाना,,
नीम तुलसी के पते का काढा पीलाना,,
नहीं सोने पर ठकनी बूढ़ीया बुलाना,,
बहुत याद आता हैं बचपन का होना ।।


घर के पास में छोटी तितली पकड़ना,,
वो तितली उड़ा फिर दूबारा पकड़ना,,
लेट कर मिट्टीयो में बहुत ही अकड़ना,,
अकड़ते हुए मा से आकर लीपटना,,
बहुत याद आता हैं बचपन का होना ।।।


दादा के कानधे चढ़ गाँव घर घुम आना,,
रात में दादा दादी का किस्सा सुनाना,,
छत पर ले जा चंदा मामा दीखाना,,
दीखाते हुए चाँद तारे गिनाना,,
बहुत याद आता हैं बचपन का होना ।।


गाँव के बाग से आम अमरूद चुराना,,
खेत में झट दूबक खीरे ककड़ी का खाना,,
पकड़े जाने पर मा को उलहन सुनाना,,
फिर गुस्से में माँ से मेरा पिट जाना,,
बहुत याद आता हैं बचपन का होना ।।।


दीन भर खेत में बाबू जी का होना,,
इधर मैं चलाऊ शरारत का टोना,,
गुरु जी का हमको ककहरा खिखाना,,
दूसरे घर में जा माँगकर मेंरा खाना,,
बहुत याद आता हैं बचपन का होना ।
हाँ बहुत याद आता हैं बचपन का होना ।।।

बाँके बिहारी बरबीगहीया

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Leave A Reply

Your email address will not be published.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More

Privacy & Cookies Policy