KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

कविता बहार बाल मंच ज्वाइन करें @ WhatsApp

@ Telegram @ WhatsApp @ Facebook @ Twitter @ Youtube

बसंत आया दूल्हा बन

0 114

बसंत आया दूल्हा बन     

बसंत आया दूल्हा बन,
बासंती परिधान पहन।
उर्वी उल्लासित हो रही,
उस पर छाया है मदन।।

पतझड़ ने खूब सताया,
विरहा में थी बिन प्रीतम।
पर्ण-वसन सब झड़ गये,
किये क्षिति ने लाख जतन।।

ऋतुराज ने उसे मनाया,
नव कोपलें ,नव पल्हव।
फिर से बनी नव यौवना ,
मही मनमुदित है मगन।।

वसुंधरा पर हर्ष छाया ,
सभी मना रहे हैं उत्सव।
सोलह श्रृंगारित है धरा
लग रही है आज दुल्हन।।

नोट- धरती के पर्यायवाची-उर्वी,क्षिति, मही,वसुंधरा, धरा

मधु सिंघी,नागपुर(महाराष्ट्र)

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.