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बूढी दिल्ली पर कविता

दिल्ली देश की राजधानी है जहा राजनितिक हलचल का केंद्र रही है है एक कटाक्ष है दिल्ली के ऊपर / दिल्ली ने हमें क्या दिया और दिल्ली के दिल में क्या है /

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बूढी दिल्ली पर कविता

दिल्ली तेरे आंख पे काला चश्मा।
दिल्ली तेरे दिल में काली काली करतूते।
दिल्ली इंसानों का खून चोसने वाली बिल्ली।
दिल्ली तेरे जिस्म में बलात्कार की बीमारी।

दिल्ली तेरे सर के सफ़ेद बालो में काला तिल।
दिल्ली तेरे सांसो में घुलता प्रदुषण का जहर।
दिल्ली तेरा इतिहास लाल खून से सना
दिल्ली हिंसा नफरतो का मैदाने ए जंग।

दिल्ली ऐबक मुग़ल बादशाओ की कब्रगाह।
दिल्ली तेरी छाती पर लिखी अंग्रेजों के जुल्म की दास्ताँ।
दिल्ली तेरा दिल पत्थर जैसा लालकिला
दिल्ली तेरे छुपे झोले में क्या?

चोर लूटेरे ठग अपराधी नेताओ का मजमा
रईसों के ठाट बाट गरीबो की झोपडी
शराब की सजती दुकाने और मस्ती के बाज़ार
जामा मस्जिद निजामुद्दीन ओलिया के मजार।

हुमायु का मकबरा लाल किला क़ुतुब मीनार की शान।
खाने की वही छोले भठूरे परांठे तंदूरी चिकन की दूकान
अरी चल हट बूढी दिल्ली वक्त और निज़ाम बदल गया अब
तू हो गयी बूढी अब ज्यादा मेकउप न चढ़ा ||

दिल्ली बूढी दिल्ली …..

रचयिता : कमल कुमार ” आजाद “
३०४ ग्रीन गार्डन कॉलोनी बिलासपुर
छत्तीसगढ़

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