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ग़ज़ल

अमर पंकज(डाॅ अमर नाथ झा) का दीपावली पर बेहतरीन ग़ज़ल, जरूर पढ़िये

ग़ज़लः रात भर मंज़ूर जलना, जोत ने जतला दियादूर करके हर अँधेरा दीप ने दिखला दियाघिर गया था हर तरफ़ से, रात काली थी बहुत चाँद ने हँस कर मुझे पर रास्ता बतला दिया। आग की बहती नदी को पार करना था कठिनचुप्पियों ने ज़िंदगी का हर हुनर सिखला…

ग़ज़ल – रात भर बैठ कर

घात काटी गई रात भर बैठ कर ।याद काटी गई रात भर बैठ कर ।।इश्क पर बंदिशें साल दर साल की। म्यांद काटी गई रात भर बैठ कर ।।हिज्र की रात में, आपकी याद में। रात काटी गई रात भर बैठ कर ।।बोलना था हमें बोलना था तुम्हें। बात काटी गई रात भर बैठ कर ।।नील…

वो मुझे याद आता रहा देर तक (wo mujhe yaad aata rha der tak)

वो मुझे याद आता रहा देर तक,मैं ग़ज़ल गुनगुनाता रहा देर तकउसने पूछी मेरी ख़ैरियत वस्ल मेंमैं बहाने बनाता रहा देर तकउसने होठों में मुझको छुआ इस तरहये बदन कँपकपता रहा देर तकउसके दिल में कोई चोर है इसलियेमुझसे नज़रे चुराता रहा देर तकभूख़ से मर गया…

जो शख़्स जान से प्यारा है-चन्द्रभान ‘चंदन'(jo sakhsh jan se pyara hai)

जो शख़्स जान से प्यारा है पर करीब नहींउसे गले से लगाना मेरा नसीब नहींवो जान माँगे मेरी और मैं न दे पाऊँग़रीब हूँ मैं मगर इस क़दर ग़रीब नहींहसीन चेहरों के अंदर फ़रेब देखा हैमेरे लिए तो यहाँ कुछ भी अब अजीब नहींजो बात करते हुए बारहा चुराए नज़रतो…

ग़ज़ल कैसे लिखें ( How to write GAZAL)

#poetryinhindi,#hindikavita, #hindipoem, #kavitabahar🌷   आइए ग़ज़ल सीखें   🌷ग़ज़ल सीखने के लिए जरूरी है कि आपको१-मात्रा ज्ञान हो।२-रुक्न (अरकान) की जानकारी हो।३-बहरों का ज्ञान हो।४-काफ़िया का ज्ञान हो।५-रदीफ का ज्ञान हो।और फिर शेर और उसका…

तिरंगा हाथ में ले काफिला जब – जब गुजरता है ( tiranga hath me le ke kafila jab jab gujarta hai…

#poetryinhindi,#hindikavita, #hindipoem, #kavitabaharतिरंगा हाथ में ले काफिला जब - जब गुजरता है ।जवानी जोश जलवा देख शत्रु का दिल मचलता है।।कसम है हिन्दुस्तां की जां निछावर फिर करेंगे हम,नज़र कोई दिखा दे तो लहू रग - रग उबलता है ।महक सोंधी…

मुझे ये पूछते हैं सब मेरे ग़म का सबब* क्या है(mujhe ye puchhate hai sab mere gam ka sabab kya hai)

मुझे ये पूछते हैं सब मेरे ग़म का सबब* क्या है,ज़माना किस कदर समझे मुहब्बत की तलब क्या हैजो आँखें सो नहीं पाई है ख़्वाबों के बिखरने सेउन आँखों से ज़रा पूछो बिना दीयों के शब* क्या हैअगर बोलूँ किसी से कुछ तो लहज़े में मुहब्बत होमुझे घर के बुज़ुर्गों…

ढूँढूँ भला खुदा की मैं रहमत(Dhundhu bhala khuda ki main Rahmat)

बहर:- 221  2121  1221  212ढूँढूँ भला खुदा की मैं रहमत कहाँ कहाँ,अब क्या बताऊँ उसकी इनायत कहाँ कहाँ।सहरा, नदी, पहाड़, समंदर ये दश्त सब,दिखलाए सब खुदा की ये वुसअत कहाँ कहाँ।हर सिम्त हर तरह के दिखे उसके मोजिज़े,जैसे खुदा ने लिख दी इबारत कहाँ…

मुहब्बत में ज़माने का यही दस्तूर होता है

जिसे चाहो नज़र से वो ही अक्सर दूर होता हैमुहब्बत में ज़माने का यही दस्तूर होता है बुलंदी चाहता पाना हरिक इंसान है लेकिन मुकद्दर साथ दे जिसका वही मशहूर होता है ।सभी के हाथ उठते हैं इबादत को यहाँ लेकिन ख़ुदा को किसका जज़्बा देखिये  मंजूर होता…

गर्दिश में सितारे हों

(गर्दिश में सितारे हों)221  1222  22 // 221  1222  22गर्दिश में सितारे हों जिसके, दुनिया को भला कब भाता है,वो लाख पटक ले सर अपना, लोगों से सज़ा ही पाता है।मुफ़लिस का भी जीना क्या जीना, जो घूँट लहू के पी जीए,जितना वो झुके जग के आगे, उतनी ही वो…