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कविता

एक दीया

*एक दीया* तिमिर का दोष मिट गया विश्वास का दीप जलाए हम नव आशा का संचार हुआ यह जंग विजित कर जाएं हम एक युग पुरुष के आवाहन पर पूरा देश जगमगा उठा अखण्ड एकता का प्रतीक बन हर आँगन में दीप झिलमिला उठा अब कैसी भी आँधी आये आश दीप ना…

दीया जरूर जलाना है

*दीया जरूर जलाना है* आओ मिलकर दीप जलाएं, सब दुखों को दूर भगाएं। अंधकार हमें मिटाना है, दीपक सभी को जलाना है। उम्मीद का दीया जलाना है, रोशन होगा चारों दिशा। दिल से अंधकार मिटाना है, प्रकाश पर्व हमें मनाना है, गरीब अंधकार मे जी…

नीम-हकीम खतरा-ए-जान

नीम-हकीम खतरा-ए-जान आए बिल्ली जब बंद कर लेते हैं आँखें सभी कबूतर ताकि टल जाए संकट आँखें बंद नहीं लाइट बंद करने के आदेश हैं साहब के लेकिन साहब हम कबूतर नहीं और वो भी बिल्ली नहीं नीम-हकीम खतरा-ए-जान पुख्ता इंतजाम कीजिए इसे…

मन का तामस

*मन का तमस* हो तमस का घोर अंधेरा,तो तुम यूँ घबराना ना। गर पग डगमगाए तुम्हारे,तो मिलकर साथ निभाना। हाथ उठाकर प्रण करो तुम,मिलकर बोझ उठाना ना। गर अंतरतम में छाए अंधेरा,विश्वास का दीप जलाना ना। गर गली का दीप बुझा हो,अपने घर का दीप बुझाना…

दीप जलाएं

आओ मिलकर दीप जलाएं ***************** अगर दीप जलाना है हमको तो पहले प्रेम की बाती लाएं घी डालें उसमें राष्ट्र भक्ति का और राष्ट्र का गुण गान गाएं। आओ मिल कर दीप जलाएं जाति पांती वर्ग भेद भुलाकर हम हर मानव को गले लगाएं राष्ट्र में…

आओ मिल कर दीप जलाएं

गर दीप ही जलाना है हमको तो पहले प्रेम की बाती लाएं घी डालें उसमें राष्ट्र भक्ति का आओ मिल कर दीप जलाएं। जाति पांती वर्ग भेद भुलाकर हम हर मानव को गले लगाएं राष्ट्र में स्थापित हो समरसता आओ मिल कर दीप जलाएं। भुलाकर नफ़रत को अब हम…

सीखें दूसरों की गलती जानकर

सीखें दूसरों की गलती जानकर -मनीभाई नवरत्न होड़ आगे बढ़ने की, सदा से ही दुखदाई . खतरा होते पग पग में, कहीं पत्थर ,कहीं खाई. अच्छा है पीछे चलो . देखो सामने वाले की भूल . जो भी देखा ,उसे जान. दोनों हाथों से करो कबूल. नहीं…

मां , पर कविता

~ मां ~ ____________ जब मैं छोटा था तो मां कहती थी की जब बिल्ली रास्ता काटे तो बुरा होता है वही रुक जाना चाहिए ,,,,,,,,, मुझे आज भी ख्याल आ जाता है । जब बिल्ली रस्ते में आ जाती है , तो में वही रुक जाता हूं ,,,,,,,,, क्योंकि मुझे…

क्या राम फिर से आएंगे

तड़प उठी है नारी बन रही है पत्थर, दबा दिया है उसने अपने अरमानों को, छुपा लिया है उसने अपने मनोभावों को, वो जिंदा तो है मगर जीती नहीं जिंदा की तरह, जमाने की निष्ठुरता ने उसे बना दिया है अहिल्या, और आज वो इंतजार में है कि क्या राम…

दो रोटी

जर्जर सा बदन है, झुलसी काया, उस गरीब के घर ना पहुंची माया, उसके स्वेद के संग में रक्त बहा है तब जाकर वह दो रोटी घर लाया। हर सुबह निकलता नव आशा से, नहीं वह कभी विपदा से घबराया, वो खड़ा रहा तुफां में कश्ती थामे तब जाकर वह दो रोटी घर…