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कुण्डलियाँ

कोरोना से युद्ध

कोरोना से युद्ध ~~~~~~~~~~~~~ उनकी खातिर प्रार्थना, मिलकर करना आज। जो जनसेवा कर रहे, भूल सभी निज काज। भूल सभी निज काज, प्राण जोखिम में डाले। कोरोना से युद्ध , चले करने दिलवाले।…

माता की पूजा करूँ

कुंडलियाँ - माता की पूजा करूँ ~~~~~~~~~~~~~~~~ माता की पूजा करूँ , जाकर उनके द्वार। जननी मेरा भी करो, भव से बेड़ापार। भव से बेड़ापार, भजन तेरा मैं गाऊँ। बने जगत सुखधाम, प्रेम ही नित मैं…

कात्यायनी

माँ कात्यायनी(कुंडलियाँ) 🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉 माता दानव घातिनी , हरो सभी के पाप। होय दूर माँ जगत के , रोग शोक संताप।। रोग शोक सन्ताप , माता हे कात्यायनी। कालहारिणी अम्ब , आदि शक्ति वरदायनी।। कहताकवि करजोरि,मात के गुण जो गाता।…

नवरात्र

विषय-माता के नवराते विधा-कुंडलियाँ 🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉 माँ शक्ति की उपासना , होते है नवरात। मात भवानी-भक्ति में , करते हैं जगरात।। करते हैं जगरात , कृपा कर मात भवानी। होती जय जयकार , सुनो हे माता रानी।। कहता कवि करजोरि,करें सब माँ…

अपनी संस्कृति अपनाओ

अपनी संस्कृति अपनाओ, अपना अभिवादन अपनाओ! जब भी मिले दूसरो से , हाथ जोड़ मुस्कुराओ !! हाथ जोड़ मुस्कुराओ, कोरोना दूर भगाओ! हाथ धोये साबुन से थोड़ा न घबराओ !! कहे दूजराम पुकार के , सावधानी…

होली

होली छटा निहारिए, बरस रहा मधु रंग । मंदिर-मस्जिद प्रेम से, खेल रहे मिल संग ।। खेल रहे मिल संग, धर्म की भींत ढही है । अंतस्तल में आज, प्रीत की गंग बही है ।। कहे दीप मतिमंद, रहे यह शुभ रंगोली । लाती जन मन पास, अरे मनभावन…

कुंडलियाँ

कुण्डलियाँ शंका मन में मत रखो ,शुद्ध रखो आहार । हाथों को रख स्वच्छ नित, होंगे क्यों बीमार । होंगे क्यों बीमार ,नही बन आमिष भोगी । स्वस्थ निरोगी देह, रखो मत काया रोगी सदा योग से नेह, बजे कसरत का डंका करो सभी से स्नेह, तजो निज मन…

साथ – साथ- रामनाथ साहू ” ननकी “

सम्मुख यूँ बैठो रहो , जीवन जाये बीत । मुक्त भाव से गा सकें , सिर्फ प्यार के गीत ।। सिर्फ प्यार के गीत , गढ़ें हम गीत वफा के । मानस अंकित चित्र ,…

कुण्डलिया शतक (शतकवीर)

१०० कुण्डलिया ~ शतकवीर ~~~~~~~~~~~~~बाबूलालशर्मा . *कलम की सुगंध छंदशाला* . *कुण्डलिया छंद* (शतकवीर हेतु) दिनांक..16.12.2019 से 15.02.2020 तक . °°°°°°°° . १. *वेणी* मिलती संगम…

चित्रण

👀👀👀👀👀👀👀👀👀👀 दिनांक १६.०२.२०२० चित्र- चित्रण-कुण्डलिया लाया अलि ऋतुराज अब, पछुआ शुष्क समीर! प्राकृत रीति प्रतीत जग, चुभे मदन मन तीर! चुभे मदन मन तीर, लता तरु वन बौराए! चाहत प्रीत सजीव, मदन तन मन दहकाए! कहे "लाल"…