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कुण्डलियाँ

चुपचाप

•••••••••••••••••••••••••••••बाबूलालशर्मा . दिनांक - ०८.०२.२०२० कुण्डलियाँ विषय- *चितवन* चंचल चर चितवन चषक, चण्डी,चुम्बक चाप्! चपला चूषक चप चिलम,चित्त चुभन चुपचाप! चित्त चुभन चुपचाप, चाह चंडक…

चितवन

•••••••••••••••••••••••••••••बाबूलालशर्मा . दिनांक - ०८.०२.२०२० कुण्डलियाँ विषय- *चितवन* चंचल चर चपला चषक, चण्डी चूषक चाप्! चितवन चीता चोर चित, चाह चुभन चुपचाप! चाह चुभन चुपचाप, चाल चल चल…

गुरू

"कुण्डलिया" गुरू कुम्हार एक से,घड़ घड़ काडे खोट। सुन्दर रचना के लिए,करे चोट पर चोट। करे चोट पर चोट,शिष्य को खूब तपाये। नेकी पाठ पढाय ,सत्य की राह बताये। कहै मदन कविराय,बातपर कर अमल शुरू। होगा भव से पार, मिल जाये…

ताका झांका

कुंडलिया ताका झांका मत कर,निजता करे न भंग। खोटा पड़े स्वभाव जी,बिगड़े संग कुसंग। बिगड़े संग कुसंग,दशा जीवन की बिगड़े। अच्छा रखो स्वभाव,काम हो सब ही तगड़े। कहै मदन समझाय, ईश की सत्य पताका। बने आपकी साख,करे क्यू ताका झाँका।। मदन…

सावन

(04) एक कुण्डलिया रविवार 15-12-2019 ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ सावन से बदली कहे, सुनो सजन इक बात । आ सरवर को चूमलें, सूख रहे जलजात ।। सूख रहे जलजात, कुमुदिनी मान न पाए । खड़ा किनारे हंस, आँख से अश्क बहाए ।। धूमिल-सा…

काजल

*विषय- काजल* कुण्डलियाँ- सुंदरता की चाह में,काजल आँजे नैन। हिरनी जैसी देखती,कुछ नहिँ बोले बैन।। कुछ नहिँ बोले बैन,आँख से सब कुछ कहती। दिल में हरदम प्यार,सजाकर वो ही रहती।। कहे विनायक राज,देख मन मेरा भरता। नारी रूप निहार,लगे कितनी…

कविता की परिभाषा बताती यह कुण्डलियाँ, जो अनुप्रास अलंकार का नायाब उदाहरण प्रस्तुत करती बाबूलाल शर्मा…

कुण्डलियाँ विषय- कविता कविता काव्य कवित्त के, करते कर्म कठोर। कविजन केका कोकिला,कलित कलम की कोर। कलित कलम की कोर, करे कंटकपथ कोमल। कर्म करे कल्याण, कंठिनी काली कोयल। कहता कवि करजोड़, करूँ कविताई कमिता। काँपे काल कराल, कहो कम कैसे कविता।…

अमित की कुण्डिलयाँ

🙏🌷अमित की कुण्डिलयाँ🌷🙏 भाग्य विधाता भाग्य विधाता देश का, स्वयं आप श्रीमान। मिला वोट अधिकार है, करिये जी मतदान।। करिये जी मतदान, एक मत पड़ता भारी। सभी छोड़कर काम, प्रथम यह जिम्मेदारी।। कहे अमित यह आज, नाम जिनका मतदाता। मिला श्रेष्ठ सौभाग्य, आप…

अधिकार-बाबूलाल शर्मा “बौहरा”

. *अधिकार* . *कुण्डलिया* . 👀👀 भारत के संविधान में,दिए मूल अधिकार। मानवता हक में रहे, लोकतंत्र सरकार। लोकतंत्र सरकार, लोक से निर्मित होती। भूलो मत कर्तव्य, कर्म ही सच्चे मोती। कहे लाल कविराय, अकर्मी पाते गारत। मिले खूब अधिकार,सुरक्षा अपने…

बाबा गुरु घासीदास

कुंडलियाँ -- बाबा गुरु घासीदास सन्देशा गुरुदेव का, मानव सभी समान। सत्य ज्ञान जो पा सकें , वह ही है इंसान ।। वह ही है इंसान, ज्ञान को जिसने जाना । मानव सेवा धर्म, ज्ञान को सबकुछ माना ।।…