KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR
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गद्य लेखन

मनुष्य की सहज एवं स्वाभाविक अभिव्यक्ति का रूप गद्य है। कविता और गद्य में बहुत सी बातें समान हैं। दोनों के उपकरण शब्द हैं जो अर्थ परिवर्तन के बिना एक ही भंडार से लिए जाते है; दोनों के व्याकरण और वाक्यरचना के नियम एक ही हैं।
Prose is the form of simple and natural expression of man. Many things are the same in poetry and prose. Both have instrument words that are taken from the same repository without changing the meaning; The rules of grammar and syntax are the same.

राधा और मीरा

*_आखिर माताएं राधा और मीरा क्यों नहीं चाहती?_* एक विचार प्रस्तुत किया गया कि "हर माँ चाहती है कि उनका बेटा कृष्ण तो बने मगर कोई माँ यह नहीं चाहती कि उनकी…

व्यंग्य-नमक

व्यंग्य-नमक होटल में खाने के मेज पर छोटे छोटे छिद्रों वाले डिब्बे पड़े ही रहते हैं।कार्टून बने डिब्बे में नमक मिर्च भरे होते हैं, दाल सब्जी में नमक कम हो तो मन…
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