KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR
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संग्रह रचना

इतनी शक्ति हमें देना

इतनी शक्ति हमें देनाइतनी शक्ति हमें देना दाता,मन का विश्वास कमजोर हो ना।हम चलें नेक रास्ते पे हमसे,भूल कर भी कोई भूल हो ना।दूर अज्ञान के हों अँधेरे,तू हमें

आशीषों का आँचल भरकर प्यारे बच्चो लाई हूँ।

आशीषों का आँचल भरकर प्यारे बच्चो लाई हूँ।आशीषों का आँचल भरकर, प्यारे बच्चो लाई हूँ।युग जननी मैं भारत माता, द्वार तुम्हारे आई हूँ।तुम ही मेरे भावी

हम कुछ करके दिखलाएँगे

हम कुछ करके दिखलाएँगेहै शौक यही, अरमान यही, हम कुछ करके दिखलाएँगे।मरने वाली दुनिया में हम, अमरों में नाम लिखाएँगे।जो लोग गरीब भिखारी हैं, जिन पर न किसी

वह देश कौन-सा है?

वह देश कौन-सा है?मनमोहिनी प्रकृति की जो गोद में बसा है,सुख स्वर्ग-सा जहाँ है, वह देश कौन सा है?जिसका चरण निरन्तर रत्नेश धो रहा है,जिसका मुकुट हिमालय,

न यह समझो कि हिन्दुस्तान की तलवार सोई है

न यह समझो कि हिन्दुस्तान की तलवार सोई हैन यह समझो कि हिन्दुस्तान की तलवार सोई है।जिसे सुनकर दहलती थी कभी छाती सिकंदर की,जिसे सुनकर कि कर से छूटती थी

खून दिया है मगर नहीं दी कभी देश की माटी है

खून दिया है मगर नहीं दी कभी देश की माटी हैयुगों-युगों से यही हमारी बनी हुई परिपाटी है,खून दिया है, मगर नहीं दी कभी देश की माटी है।इस धरती पर जन्म लिया

दुश्मन के लोहू की प्यासी भारत की तलवार है

दुश्मन के लोहू की प्यासी भारत की तलवार हैअरे! तुम्हारे दरवाजे पर दुश्मन की ललकार हैभारत की रणमत्त जवानी, चल क्या सोच विचार है।राणा के वंशजो, शिवा के पूतो,

खड़ा हिमालय बता रहा है

खड़ा हिमालय बता रहा हैखड़ा हिमालय बता रहा है, डरो न आँधी पानी में।खड़े रहो अपने ही पथ पर, कठिनाई - तूफानों में।डिगो न अपने पथ से तो फिर, सब कुछ पा सकते

हम अर्चना करेंगे

हम अर्चना करेंगेहे जन्म-भूमि भारत, हे कर्मभूमि भारत,हे वन्दनीय भारत, अभिनन्दनीय भारत,जीवन सुमन चढ़ाकर, आराधना करेंगे,तेरी जनम-जनम भर, हम वन्दना करेंगे। हम

वह जीवन भी क्या जीवन है

वह जीवन भी क्या जीवन हैवह जीवन भी क्या जीवन है, जो काम देश के आ न सका।वह चन्दन भी क्या चन्दन है, जो अपना वन महका न सका।जिसकी धरती पर जन्म लिया, जिसके