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विविध छंद

पिता ईश सम है दातारी

👀👀👀👀👀👀👀👀👀 ~~~~~~~~~~~~बाबूलालशर्मा . *चौपाई मुक्तक* . °°°°°°°°° . 🌼 *पिता* 🌼 . °°°°° पिता ईश सम हैं दातारी। कहते कभी नहीं लाचारी। देना ही बस धर्म पिता का। आसन ईश्वर सम व्यवहारी।१ तरु बरगद सम छाँया…

हे शारदे माँ

हरिगीतिका छंद- छत्तीसगढ़ी में- 2212 2212 2212 2212 *हे शारदे माँ* (1) हे शारदे माँ ज्ञान के,भंडार झोली डार दे। आये हवौं मँय द्वार मा,मन ज्योति भर अउ प्यार दे।। हे हंस के तँय वाहिनी,अउ ज्ञान के तँय दायिनी। हो देश मा सुख शांति हा,सुर…

बसन्त गीत

आधार छंद- सार छंद बसन्त गीत - सादर समीक्षार्थ - ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ लगे सुहाना मौसम कितना, मन तो है मतवाला। देख बसन्त खिले कानन में, फूलों की ले माला।। शीतलता अहसास लिए हैं,…

बसन्त आयो रे

ताटंक छंद - गीत *ऋतु बसन्त आयो रे* ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ ऋतु बसन्त शुभ दिन आयो रे, सबके मन को भायो रे। पात-पात हरियाली सुन्दर, मधु बन भीतर छायो रे।। नीला अम्बर खूब सितारे…

अयोध्या के राम

विषय-अयोध्या के राम विधा-ताटंक छन्द 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 पूरा कर वनवास सिय संग, राम अयोध्या आते है। भ्राता लखन साथ में उनके अनुपम शोभा पाते हैं।। 🕉🕉🕉🕉 हुई अयोध्या भी सनाथ थी…

*अपनाओ देशी*

विष्णुपद छंद (सम मात्रिक) देशभक्ति गीत इंग्लिस्तानी छोड़ सभ्यता,अपनाओ देशी हिंदुस्तानी रहन-सहन हो,छोड़ो परदेशी। वही खून फिर से दौड़े जो,भगतसिंह में था, नहीं देश से बढ़कर दूजा, भाव हृदय में था, प्रबल भावना देशभक्ति…

भारत की जयकार कर-कन्हैया साहू ‘अमित’

उल्लाला छंद~भारत की जयकार कर देशप्रेम रग-रग बहे, भारत की जयकार कर। रहो जहाँ में भी कहीं, देशभक्ति व्यवहार कर। मातृभूमि मिट्टी नहीं, जन्मभूमि गृहग्राम यह।स्वर्ग लोक से भी बड़ा, परम पुनित निजधाम यह।जन्म लिया सौभाग्य से, अंतिम तन संस्कार

बेटी- माँ

👀👀👀👀👀👀👀 ~~~~~~~~~बाबूलालशर्मा . *बेटी -माँ* . 🤱🤷‍♀ . ( मुक्तक ) समाजी सोच बदलो तो, कुरीती छोड़ दो अब तो। जमाना चाँद पर पहुँचे, पढाई छोड़ मत अब तो। विकासी बात करते है, कथा भाषण भले देते। दहेजी…

मायका

👀👀👀👀👀👀👀👀👀👀 ~~~~~~~~~~~~~~~बाबूलालशर्मा . 🤷‍♀ *मायका* 🤷‍♀ . दोहा गजल मान मनौव्वल मायका, ममता मनोविचार। मंगल मय मनबात में, मामेरा मनुहार।। लाड़ लडाते थे सभी, खट्टी मीठी बात। भौजाई भाई…

मिट्टी का घट की महिमा बताती सुकमोती चौहान रुचि की छप्पय छंद में यह अनूठा काव्य

छप्पय छंद 🌹मिट्टी का घट🌹 मिट्टी घट की ओर ,चलो अब लौटे हम सब। प्लास्टिक का प्रतिबंध,मनुज स्वीकारोगे कब। मृदा प्रदूषण रोक,पीजिए घट का पानी। स्वस्थ रहेगा गात, स्वच्छता बने निशानी। घड़ा सुराही की शुद्धता, मान रहा विज्ञान भी। लाइलाज रोगों की…