KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR
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विविध छंद

छंद में प्रयुक्त अक्षरों की संख्या एवं क्रम, मात्रा-गणना होती है. इसके अलावा, यति-गति से सम्बद्ध विशिष्ट नियमों से नियोजित पद्य रचना ‘’छन्द’’ कहलाती है। छंद शब्द के मूल में गति का भाव है।

The number and order of the letters used in the verse is a quantity-calculation. In addition, the verse formulation employed by specific rules related to the Yeti-motion is called “Chhand”. At the root of the word stanza is the sense of motion.

स्वार्थी मत बन बावरे , काम करो निःस्वार्थ- रामनाथ साहू ननकी के कुंडलियाँ

स्वार्थी मत बन बावरे , काम करो निःस्वार्थ स्वार्थी मत बन बावरे , काम करो निःस्वार्थ ।शुद्ध भाव से कीजिए , जीवन में परमार्थ ।।जीवन में परमार्थ , बैरता बंधन

केवरा यदु “मीरा ” के अपने श्याम के प्रति दोहे

केवरा यदु "मीरा " के दोहे पागल मनवा ढूँढता, कहाँ मेरा चितचोर ।मन-मंदिर से झाँकता,मैं बैठा इस ओर।।पागल फिरता है कहाँ, जीवन है दिन चार ।वाणी में रस

हिन्दी कविता : नंद नयन का तारा है,विधा तांटक छंद,डिजेन्द्र कुर्रे

इस रचना को अधिक से अधिक शेयर करें ताटंक छंद - नंद नयन का तारा है ★★★★★★★★★★★ कोयल कूके जब अमुवा पर, मन भौंरा इठलाता है। तान बाँसुरी की…

हिन्दी कविता : कोहिनूर की आभा विधा दोहे रचनाकार डिजेन्द्र कुर्रे

*कोहिनूर की आभा* ★★★★★★★★★★ सार भरा ऋग्वेद में ,देवों का आह्वान। लिखा वेद जी व्यास ने,जिसका अतुल विधान।। यजुर्वेद में मंत्र का,पावन है विस्तार। मुनिजन…

मोहिनी

विषय-मोहिनी विधा-कुंडलियाँ 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 सूरत है मन मोहिनी, राधा माधव साथ। हुए निरख सब बावरे, ले हाथों में हाथ।। ले हाथों में हाथ, छवि लगती अति…