KAVITA BAHAR
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दोहा

दोहा अर्द्धसम मात्रिक छंद है। यह दो पंक्ति का होता है इसमें चार चरण माने जाते हैं | इसके विषम चरणों (प्रथम तथा तृतीय) में १३-१३ मात्राएँ और सम चरणों (द्वितीय तथा चतुर्थ) में ११-११ मात्राएँ होती हैं।
Doha is a semantic verse. It is of two lines, it consists of four steps. Its odd phases (first and third) have 13–13 quantities and even phases (second and fourth) have 11–11 quantities.

श्रमिक

विषय-श्रमिक विधा-दोहा ?????????? खून पसीना एक कर,करता जग कल्याण। औरों के हित के लिए, देता अपने प्राण।। ???? स्वेद बहे मजदूर का,…

पुस्तक होती है सदा

विषय-पुस्तक पुस्तक होती है सदा, सबसे अच्छा मित्र। ज्ञान हमे देती यही, प्रस्तुत करती चित्र।।१।। पुस्तक पढ़कर के मनुज ,बनता है विद्वान। जीवन के हर दुख…

दोहे सच

दोहे सच को सच जाने बिना,मुँह से कुछ मत बोल। सच आएगा सामने,बज जाएगा ढ़ोल।। सुनी सुनाई बात में,कुछ भी देते जोड़। रोके हम अफवाह को,जीवन के हर मोड़।। जात…

आम

दोहे-आम फल में राजा आम है,चाकू धर के काट। केसर देशी लंगड़ा,खाना इसको चाट।। कई किस्म है आम के,करता कफ को दूर। खास फायदा देह को,खाते इसको शूर।। पेट दर्द…