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घनाक्षरी

घनाक्षरी एक वार्णिक छन्द है। इसे कवित्त भी कहा जाता है। हिन्दी साहित्य में घनाक्षरी छन्द के प्रथम दर्शन भक्तिकाल में होते हैं। निश्चित रूप से यह कहना कठिन है कि हिन्दी में घनाक्षरी वृत्तों का प्रचलन कब से हुआ। घनाक्षरी छन्द में मधुर भावों की अभिव्यक्ति उतनी सफलता के साथ नहीं हो सकती, जितनी ओजपूर्ण भावों की हो सकती है।

हरितालिका तीज – राजेश पान्डेय वत्स

हरितालिका तीज! (घनाक्षरी) भाद्रपद शुक्ल पक्ष, पावन तृतीया तिथि, पूजन निर्जला ब्रत, रखें नारी देश के! माता रूप मोहनी सी, श्रृँगारित सोहनी सी, उम्र यश…

शिव – मनहरण घनाक्षरी

शिव (मनहरण घनाक्षरी) शिव शक्ति का रूप हैशक्ति बड़ी अनूप हैकहते भोले भंडारीशिव को मनाइए।।1।।शीश पर गंग धारेभक्तों के कष्ट उबारेमृत्युंजय…

चैत्र नवरात्र पर घनाक्षरी

चैत्र नवरात्र पर घनाक्षरी विधा - मनहरण घनाक्षरी (नववर्ष) जब हो मन हर्षित,नव ऊर्जा हो संचित, कर्म की मिले प्रेरणा,तभी नववर्ष है। दिलों में भाईचारा…