KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR
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कुण्डलियाँ

कुंडलियाँ दोहा और रोला के संयोग से बना छंद है। इस छंद के ६ चरण होते हैं तथा प्रत्येक चरण में २४ मात्राएँ होती है। कुंडलियाँ छंद में दूसरे चरण का उत्तरार्ध तीसरे चरण का पूर्वार्ध होता है।

Kundaliyas are verses composed of a combination of Doha and Rolla. This stanza has 4 stages and each phase has 24 volumes. In the Kundaliya verse, the second half of the second phase is the first half of the third phase.

शीत में निर्धन का वस्त्र- अखबार

शीत में निर्धन का वस्त्र -अखबारकाया काँपे शीत से, ओढ़े तन अखबार। शीत लहर है चल रही, पड़े ठंड की मार। पड़े ठंड की मार, नन्हा सा निर्धन बच्चा। शीत कहाँ दे चैन,…

मदिरा मंंदिर एक सा- रामनाथ साहू ” ननकी “

मदिरा का पर्याय है , माधव मोहन प्यार ।कभी कहीं उतरे नहीं , छके भरे रससार ।।छके भरे रससार , प्रेमरस पीले पगले ।क्या जाने कल वक्त , मिले या आगे अगले ।।कह ननकी

किसान (कुण्डलिया)-मदन सिंह शेखावत

किसानखेती खुशियो की करे, बोए प्रेम प्रतीत।निपजाता मोती बहुत, सुन्दर आज अतीत।सुन्दर आज अतीत,पेट कब वह भर पाता।हालत बहुत खराब, दीन है अन्न प्रदाता।कहे मदन

हिन्दी हिन्दुस्तान की भाषा मात समान-बाबू लाल शर्मा

हिन्दी हिन्दुस्तान की भाषा मात समान- कुण्डलिया छंदहिन्दी हिन्दुस्तान की भाषा मात समान- कुण्डलिया छंद१हिन्दी हिन्दुस्तान की, भाषा मात समान।देवनागरी लिपि

शिक्षक जग विख्यात है करे राष्ट्र निर्माण

शिक्षक जग विख्यात है करे राष्ट्र निर्माणशिक्षक सदगुण से भरे , रहें ज्ञान संपन्न ।ऊँचे ही आदर्श हो , विद्या नहीं विपन्न ।।विद्या नहीं विपन्न , तभी तो

मन का मंथन- रामनाथ साहू ” ननकी “

मन का मंथनमंथन मानस का करो , जानो सत्य असत्य ।कहाँ गुमी हैं मंजिलें , बूझ दिशा क्या गत्य ।।बूझ दिशा क्या गत्य , लक्ष्य से कब है छूटा ।भटका अपने मूल ,

ऊर्जा संरक्षण 

ऊर्जा संरक्षण          (1) ऊर्जा सदा बचाइये, सीमित यह भंडार। धरती का वरदान है, जग विकासआधार।जग विकास आधार , समझ कर इसे खरचना। बढ़े नहीं यह और , सोचकर सभी…

दादा जी के संग में

दादा जी के संग मेंदादा जी के संग में , इस जीवन के ज्ञान । मेरे सच्चे मित्र सम ,जाते हैं मैदान ।। जाते हैं मैदान ,खेल वो मुझे सिखाते । प्रेरक गहरी बात , कहानी…

हालत देख किसान की , बदतर होता आज

हालत देख किसान की , बदतर होता आजहालत देख किसान की , बदतर होता आज । कुर्सी वाले कर रहे , हैं किसान पर राज ।। हैं किसान पर राज , प्रहारी कुर्सी वाला । पिसता सदा…

नये सृजन संकल्प , दे चला देखो विघटन

 ------ विघटन ------विघटन की चलती क्रिया , मत होना हैरान । नियम सतत् प्रारंभ है , शायद सब अंजान ।। शायद सब अंजान , बदलते  गौर करो तुम । आज अभी जो प्राप्त ,…