KAVITA BAHAR
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कुण्डलियाँ

कुंडलियाँ दोहा और रोला के संयोग से बना छंद है। इस छंद के ६ चरण होते हैं तथा प्रत्येक चरण में २४ मात्राएँ होती है। कुंडलियाँ छंद में दूसरे चरण का उत्तरार्ध तीसरे चरण का पूर्वार्ध होता है।

Kundaliyas are verses composed of a combination of Doha and Rolla. This stanza has 4 stages and each phase has 24 volumes. In the Kundaliya verse, the second half of the second phase is the first half of the third phase.

हिन्दी कुंडलियां : सरगम विषय

हिन्दी कुंडलियां : सरगम विषय सरगम है जानो सदा, सप्तसुरों का साज।पाकर स्वर संगीत को , मिले नयी परवाज ।मिले नयी परवाज, साधना सप्त सुरों में।करें…

उत्सव यह गणतंत्र का

उत्सव यह गणतंत्र का उत्सव यह गणतंत्र का , राष्ट्र मनाये आज ।जनमानस हर्षित सकल , खुशी भरे अंदाज ।।खुशी भरे अंदाज , गगनभेदी स्वर गाते ।भारत भूमि…

आजा अब परदेशिया

आजा अब परदेशिया आजा अब परदेशिया , तरस रहे हैं नैन ।बाट जोहती हूँ खड़ी , पल भर खोजूँ चैन ।।पल भर खोजूँ चैन , लगे जग सारा सूना ।सावन भादो मास , अश्रु…

शीत में निर्धन का वस्त्र- अखबार

शीत में निर्धन का वस्त्र -अखबार काया काँपे शीत से, ओढ़े तन अखबार। शीत लहर है चल रही, पड़े ठंड की मार। पड़े ठंड की मार, नन्हा सा निर्धन बच्चा। शीत…

मदिरा मंंदिर एक सा- रामनाथ साहू ” ननकी “

मदिरा का पर्याय है , माधव मोहन प्यार ।कभी कहीं उतरे नहीं , छके भरे रससार ।।छके भरे रससार , प्रेमरस पीले पगले ।क्या जाने कल वक्त , मिले या आगे अगले…

किसान (कुण्डलिया)-मदन सिंह शेखावत

किसान खेती खुशियो की करे, बोए प्रेम प्रतीत।निपजाता मोती बहुत, सुन्दर आज अतीत।सुन्दर आज अतीत,पेट कब वह भर पाता।हालत बहुत खराब, दीन है अन्न…

हिन्दी हिन्दुस्तान की भाषा मात समान-बाबू लाल शर्मा

हिन्दी हिन्दुस्तान की भाषा मात समान- कुण्डलिया छंद हिन्दी हिन्दुस्तान की भाषा मात समान- कुण्डलिया छंद १हिन्दी हिन्दुस्तान की, भाषा मात…

शिक्षक जग विख्यात है करे राष्ट्र निर्माण

शिक्षक जग विख्यात है करे राष्ट्र निर्माण शिक्षक सदगुण से भरे , रहें ज्ञान संपन्न ।ऊँचे ही आदर्श हो , विद्या नहीं विपन्न ।।विद्या नहीं विपन्न , तभी…

मन का मंथन- रामनाथ साहू ” ननकी “

मन का मंथन मंथन मानस का करो , जानो सत्य असत्य ।कहाँ गुमी हैं मंजिलें , बूझ दिशा क्या गत्य ।।बूझ दिशा क्या गत्य , लक्ष्य से कब है छूटा ।भटका अपने…

ऊर्जा संरक्षण 

ऊर्जा संरक्षण           (1) ऊर्जा सदा बचाइये, सीमित यह भंडार। धरती का वरदान है, जग विकासआधार। जग विकास आधार , समझ कर इसे खरचना। बढ़े नहीं यह और ,…