KAVITA BAHAR
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चलो तिरंगा लहराएँ

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चलो तिरंगा लहराएँ

गणतंत्र दिवस का नया सबेरा,   
यूँ ही ना मुस्काया।


          चढ़े सैकड़ों बलिवेदी पर, 
          तब ये शुभदिन आया।


लाखों जुल्म सहे हमने,
तब आजादी को पाया।


            विधि लिखा विद्वानों ने,    
            भारत गणतंत्र बनाया।


जन मन के प्राँणों से प्यारा, 
भारत देश सजाया।

           श्रद्धा से कर वंदन उनको, 
           आज प्रदीप जलाएँ।

उनके तप का पावन ध्वज,  
चलो तिरंगा लहराएँ।


             रविबाला ठाकुर”सुधा”
          शिक्षिका M/S जरहाटोला
                    स./लोहारा

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