कविता 47 चमकीले मोती- मनीभाई नवरत्न

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कविता 47
चमकीले मोती
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ये पानी नहीं ,
चमकीले मोती हैं।
बारिश होते देखा तो होगा ?
ये पानी नहीं,
अमृत की बूंदें हैं ।
तूने प्यास कभी बुझाया तो होगा?
ये पानी प्रभु का प्रसाद है।
इस पानी में जीने का स्वाद है।
धरा पर अमूल्य ये,
पर है सबसे कीमती।
बेरंग होकर भी,
खुशियों के सारे  रंग भरती।
कलकल छलछल
सात सुरों के सरगम
जीवन के हर संगीत
संजोए हुये बहती।
जड़ होते हुए चेतनायुक्त
बेजुबान होते हुए भी
आगाह करती हमको।
कभी सूखा, कभी बाढ़
समन्दर की लहरों से बताती
मानव को उसका अस्तित्व।
मनीभाई”नवरत्न”

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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

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