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चंद एहसास – मुक्तक – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

यहाँ चंद एहसास मुक्तक के रूप में प्रकाशित किये गए हैं |
चंद एहसास – मुक्तक – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

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चंद एहसास – मुक्तक – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

१.

काट कर रख दिए हैं पर उसने मेरे
चाह कर भी उड़ नहीं सकता यारो
गर रजा है उसकी मेरे न उड़ने में
तो पर पाकर भी क्या करूंगा यारों |

२.

खिलते हैं फूल घर में उसी के
जिन्हें फूलों से प्यार है
फूलों बगैर जिन्दगी
होती वीरान है |

३.

इस दुनिया के खेल भी अजब निराले हैं
कहीं खुशियों की परवाह नहीं
कहीं खुशियों के लाले हैं
कहीं फिकता है खाना सड़कों पर
और कहीं एक- एक टुकड़े रोटी के लाले हैं |

४.

बिन पंखों के जी रहा हूँ मैं
कटे पंखों के सहारे जी रहा हूँ मैं
फिर भी दूर आसमान में
बसेरा बनाने की है चाहत मेरी |

५.

पन्नों पर शब्दों को तराशने का
दौर अब भी है जारी
ये वो शै है
जिसकी कोई स्याह रात नहीं

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