Join Our Community

Publish Your Poems

CLICK & SUPPORT

बारी के पताल-महेन्द्र देवांगन माटी

0 112

बारी के पताल

वाह रे हमर बारी के पताल ।
ते दिखथस सुघ्घर लाल लाल ।।

गरीब अमीर दुनो तोला भाथे ।
झोला मे भर भरके तोला लाथे ।।

CLICK & SUPPORT

तोर बिना कुछु साग ह नइ मिठाये ।
सलाद बनाके तोला भात मे खाये ।।

धनिया मिरची मिलाके चटनी बनाथे।
रोटी अऊ बासी मे चाट चाट के खाथे।।

वाह रे हमर बारी के पताल।
ते दिखथस सुघ्घर लाल लाल ।।


*महेन्द्र देवांगन “माटी”* ✍
*पंडरिया छत्तीसगढ़*
?????????

Leave A Reply

Your email address will not be published.