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छत्तीसगढ़ महतारी

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छत्तीसगढ़ महतारी

छत्तीसगढ़ी कविता
छत्तीसगढ़ी कविता

              
सुघ्घर हाबय छत्तीसगढ़ महतारी,
एला कइथे भईया धान के कटोरा,
आवव मयारू मितान संगवारी मन,
नवा छत्तीसगढ़ राज बनाय बर हे।

  * छत्तीसगढ़

बोली-भाखा,जात-पात, छुआ-छुत ल,
छोड़ के कहव हमन हाबन एखर संतान,
महानदी, अरपा, पइरी, इंन्द्रावती नदी म,
बांध बंधवा के खेत म पानी पहुंचाय बर हे।
जम्मो कमाईया मन ल काम-बुता मिलय,
देवभोग अऊ सोनाखान के खनिज ल,
विदेशी मन के हाथ म खोंदन नि देवन,
एला हमी मन बासी खा के खोंदे बर हे।
जम्मो कोनो मजदूर-किसान मन ल,
मया-परेम ले मिल-जुल के कमाहीं,
छत्तीसगढ़ महतारी के कोनो संतान ल,
भुख ले मरन नि देवन बरोबर खाय बर हे।
धरती दाई ल मिल-जुल के करन सिंगार,
छत्तीसगढ़ महतारी के हरिहर लुगरा ल,
रूख-राई लगा के हरिहर-हरिहर रखन,
छत्तीसगढ़ ल महर-महर महकाय बर हे।
बईला-नागर चिखला-पानी ले बदे मितानी,
छत्तीसगढ़ के भुईयां म रिकीम-रिकीम के,
धान-चाउर उपजा के छत्तीसगढ़ ल,
एक सवृद्शाली राज बनाय बर हे ।
                  (रचना वर्ष – 1995)
       रचनाकार- पुनीत राम सूर्यवंशी
       ग्राम-लुकाउपाली छतवन
       पोस्ट-रीकोकला
        जिला-बलौदाबाजर छत्तीसगढ़
कविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद

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