चूमता तिरंगा आसमान – हरिश्चन्द्र त्रिपाठी

चूमता तिरंगा आसमान – हरिश्चन्द्र त्रिपाठी

आन बान शान का ,विधान आज देखिये,
हो रहा है देश का ,उत्थान आज देखिये।1।

अप्सरा भी स्वर्ग से,उतरने को उतावली,
धन्य भरत-भूमि की मुस्कान आज देखिये।2।

सप्तरंगी परिधान अम्बर को मोह रहा-
चूमता तिरंगा आसमान आज देखिये।3।

नित्य नव प्रशस्त पन्थ देश-प्राण बढ़ रहा,
जिसके हाथ में सजग कमान आज देखिये।4।

ऊॅच-नीच,भेदभाव ,शोषण-दमन नहीं,
समरस का हो रहा बिहान आज देखिये।5।

हौंसले बुलन्द यहॉ देशवासियों के हैं ,
‘हरीश’ वे प्रणम्य नव जवान आज देखिये।6।

राष्ट्र-धर्म से बड़ा न धर्म कोई भी यहॉ,
द्रोहियों का मिटता निशान आज देखिये।7।

नित विकास का नया स्तम्भ बन रहा,
देश का है पूज्य संविधान आज देखिये।8।

मौलिक एवम अप्रकाशित।

हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘हरीश’,
रायबरेली (उप्र)-

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