चोरी चोरी नजर मिली धीरे धीरे असर हुई

चोरी चोरी नजर मिली धीरे धीरे असर हुई .
तुझको क्यों ना खबर मिली मुझको मगर हो गई .
तन्हा तन्हा यह मौसम तन्हा हुआ मन .
अब तन्हाई में क्या करें तन्हा हुआ जीवन .
तनहाई का मुझे अब तो डर हुई .
चोरी चोरी नजर मिली …..
प्यार में होश कहां है हम पर तुमसे खामोश कहां हैं .
तू जहां पर हम वहां पर इसमे मेरा दोष कहां है ।
तेरे सूरत से घायल जिगर हुई ।
चोरी चोरी नजर मिली …..
लाखों पाए हमने खुशी पर ना तुझ सा कोई हंसी .
तेरी मुझ पर क्या जादू ओ दिलरुबा ओ हमनशी ।
आंखों से उतर कर तू दिलबर हुई ।
चोरी चोरी नजर मिली ….
आप मेरे पास आ तुझको प्यार दूं .
सच कहता हूं मैं तुझे जिंदगी सवार दूं .
तेरे लिए तो मस्ताना शहर हुई .
चोरी चोरी नजर मिली. ….
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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

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