KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

कोरोना सम्बन्धी दोहे – हरिश्चन्द्र त्रिपाठी’ ‘हरीश’

0 64

कोरोना सम्बन्धी दोहे

जीवन की यह त्रासदी,
नहीं सकेंगे भूल,
एक भाव दिखने लगा,
माटी,सोना,फूल ।1।

नहीं कोरोना थम रहा ,
असफल सभी प्रयास ,
राजनीति नेता करें,
जनता हुई उदास ।2।

राम-भरोसे चल रही,
जीवन की हर सॉस,
प्राण वायु बिन मर रहे,
पड़ी गले में फॉस 3।

अगर बहुत अनिवार्य तो,
घर से बाहर जाय ,
समझ-बूझ मुख-आवरण,
तुरतहिं लेय लगाय।4।

संक्रमण के दौर में,
बचें बचायें आप,
मास्क लगा दूरी बना,
ना माई ना बाप ।5।

कोरोना के नाश-हित ,
इतना है अनुरोध,
ए सी ,कूलर भूल कर,
नहीं चलायें लोग ।6।

जी भर काढ़ा पीजिये,
सुबह-शाम लें भाप,
कोरोना भग जाएगा,
देखो अपने आप ।7।

पोषण समुचित लीजिए,
चाहें, रहें निरोग ,
नहीं संक्रमण छू सके,
करें अगर नित योग ।8।


हरिश्चन्द्र त्रिपाठी’ ‘हरीश’,
रायबरेली (उ प्र) 229010
9415955693,9125908549

Leave a comment